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Question
अपने शब्दों में आकृति सहित स्पष्टीकरण लिखिए।
नाइट्रोजन चक्र
Long Answer
Solution
वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन का सँक्रमण सतत रूप से होता रहता है, जो नीचे की ओर जमीन तक, फिर जमीन से वनस्पतियों की ओर, फिर वनस्पतियों से प्राणियों की ओर, और इन प्राणियों से पुनः भूमि की ओर, और भूमि से पुनः वायुमंडल तक ऐसे चक्रीय प्रवाह के रूप में होता है। इस नाइट्रोजन के चक्रीय प्रवाह को "नाइट्रोजन चक्र" कहा जाता है।
- नाइड्रोजन के स्रोत: वायुमंडल में मौजूद आण्विक रूप में किसी भी नाइट्रोजन को वनस्पतियाँ नहीं उपभोग सकतीं हैं। वनस्पतियाँ भूमि के विभिन्न प्रकार के नाइट्रोजन लवण का उपयोग करतीं हैं। अर्थात्, वनस्पतियों के लिए भूमि के नाइट्रोजन लवण ही मुख्य और एकमात्र स्रोत होते हैं।
- नाइट्रोजन का स्थिरीकरण: हवा में मौजूद आण्विक नाइट्रोजन को उनके लवण रूप में बदलने की प्रक्रिया को "नाइट्रोजन का स्थिरीकरण" कहते हैं। नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के दो प्रकार होते हैं।
(a) भौतिक प्रक्रिया
(b) जैविक प्रक्रिया।
- भौतिक प्रक्रिया: वर्षा के समय, जब चमकदार बिजली चमकती है, तो हवा में मौजूद नाइट्रोजन का ऑक्सीकरण होता है। इस कारण, नाइट्रोजन गैस नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) में बदल जाता है। नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस वर्षा के साथ जल में मिल जाता है, जिससे नाइट्रस और नाइट्रिक अम्ल बनते हैं। इन अम्लों को मिट्टी अवशोषित कर लेती है, और उनके साथ मिट्टी के अन्य तत्वों के साथ प्रतिक्रिया करके नाइट्रोजन के यौगिक बनते हैं। इस प्रक्रिया को "नाइट्रोजन का भौतिक स्थिरीकरण" कहा जाता है।
- \[\ce{{हवा की नाइट्रोजन} ->[{बिजली}]{नाइट्रोजन ऑक्साइड}}\]
- नाइट्रोजन ऑक्साइड + बरसात का पानी → नाइट्रस अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल।
- जैविक प्रक्रिया:
- शिंबावर्गीय (फलियाँवाली) वनस्पतियों की जड़ो की गाँठों में राइज़ोबियम प्रजाति के सहजीवी जीवाणु रहते हैं। ये जीवाणु नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकरण करते हैं।
- मिट्टी में स्वतंत्र जीवन जीने वाले एज़ोटोबैक्टर तथा क्लॉस्ट्रिडियम जीवाणु नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकरण करते हैं।
- पानी में बढने वाली नॉस्टॉक तथा एनाबिना नील हरित शैवाल नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकरण करते हैं।
- भौतिक प्रक्रिया: वर्षा के समय, जब चमकदार बिजली चमकती है, तो हवा में मौजूद नाइट्रोजन का ऑक्सीकरण होता है। इस कारण, नाइट्रोजन गैस नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) में बदल जाता है। नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस वर्षा के साथ जल में मिल जाता है, जिससे नाइट्रस और नाइट्रिक अम्ल बनते हैं। इन अम्लों को मिट्टी अवशोषित कर लेती है, और उनके साथ मिट्टी के अन्य तत्वों के साथ प्रतिक्रिया करके नाइट्रोजन के यौगिक बनते हैं। इस प्रक्रिया को "नाइट्रोजन का भौतिक स्थिरीकरण" कहा जाता है।
- सजीवों द्वारा नाइट्रोजन के योगिकों का होने बाला उपयोग:
- वनस्पतियाँ नाइट्राइट्स तथा नाइट्रेट्स् के स्वरूप में मिट्टी में से नाइट्रोजन अवशोषित करती हैं। उनसे वनस्पतियाँ प्रोटीन तथा उनके जैसे नाइट्रोजनयुक्त यौगिक तैयार करती हैं।
- शाकाहारी प्राणी अपने प्रोटीन की आवश्यकता को वनस्पतियों के सेवन से पूरा करते हैं। इन शाकाहारी प्राणियों के शरीर में प्रोटीन का प्रथम पाचन होता है, और इस प्रक्रिया में अमीनो अम्ल बनते हैं। वे स्वयं के लिए आवश्यक प्रोटीन को अमीनो अम्लों के संयोजन से तैयार करते हैं।
- अमोनीकरण: इसमें सजीवों के अवशेष तथा उत्सर्जित के विघटन से अमोनिया मुक्त होती है।
- नाइट्रीकरण: अमोनिया का रूपांतरण नाइट्राइट तथा नाइट्रेट में होता है।
- विनाइट्रीकरण: नाइट्रोजन के योगिकों का नाइट्रोजन गैस में रूपांतरण होता है।
नाइट्राेजन चक्र
shaalaa.com
जैव रासायनिक चक्रण - नाइट्रोजन चक्र
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