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Question
अपनी कक्षा में इस शीर्षक क्या वाइरस सजीव हैं अथवा निर्जीव, पर चर्चा करें?
Answer in Brief
Solution
वाइरस:
इनकी खोज सर्वप्रथम इवानोवस्की (Iwanovsky, 1892), ने की थी। ये प्रूफ फिल्टर से भी छन जाते हैं। एमडब्ल्यू. बीजेरिन्क (M.W. Beijerinck, 1898) ने पाया कि संक्रमित (रोगग्रस्त) पौधे के रस को स्वस्थ पौधो की पत्तियों पर रगड़ने से स्वस्थ पौधे भी रोगग्रस्त हो जाते हैं। इसी आधार पर इन्हें तरल विष या संक्रामक जीवित तरल कहा गया। डब्ल्यू.एम. स्टैनले (W.M. Stanley, 1935) ने वाइरस को क्रिस्टलीय अवस्था में अलग किया। डालिंगटन (Darlington, 1944) ने खोज की कि वाइरस न्यूक्लियोप्रोटीन्स से बने होते हैं। वाइरस को सजीव तथा निर्जीव के मध्य की कड़ी मानते हैं।
वाइरस के सजीव लक्षण
- वाइरस प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) से बने होते हैं।
- जीवित कोशिका के सम्पर्क में आने पर ये सक्रिय हो जाते हैं। वाइरस का न्यूक्लिक अम्ल पोषक कोशिका में पहुँचकर कोशिका की उपापचयी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित करके स्वद्विगुणन करने लगता है और अपने लिए आवश्यक प्रोटीन का संश्लेषण भी कर लेता है। इसके फलस्वरूप विषाणु की संख्या की वृद्धि अर्थात् जनन होता है।
- वाइरस में प्रवर्धन केवल जीवित कोशिकाओं में ही होता है।
- इनमें उत्परिवर्तन के कारण आनुवंशिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
- वाइरस ताप, रासायनिक पदार्थ, विकिरण तथा अन्य उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं।
- वे मेजबान कोशिका की जैवसंश्लेषक मशीनरी पर कब्ज़ा कर लेते हैं और उनके गुणन के लिए आवश्यक रसायनों का उत्पादन करते हैं।
वाइरस के निर्जीव लक्षण
- इनमें एन्जाइम्स के अभाव में कोई उपापचयी क्रिया स्वतन्त्र रूप से नहीं होती।
- वाइरस केवल जीवित कोशिकाओं में पहुँचकर ही सक्रिय होते हैं। जीवित कोशिका के बाहर ये निर्जीव रहते हैं।
- वाइरस में कोशा अंगक तथा दोनों प्रकार के न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) नहीं पाए जाते।
- वाइरस को रवों के रूप में निर्जीवों की भाँति सुरक्षित रखा जा सकता है। रवे की अवस्था में भी इनकी संक्रमण शक्ति कम नहीं होती।
- क्रिस्टलीकृत होने की क्षमता.
- प्रोटोप्लास्ट की कमी.
- ऊर्जा भंडारण प्रणाली का अभाव.
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विषाणु (वायरस), वाइराइड, प्रोंसक (प्रिओन) तथा लाइकेन
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