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औपनिवेशिक शासनकाल में कृषि की गतिहीनता के मुख्य कारण क्या थे? - Economics (अर्थशास्त्र)

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Question

औपनिवेशिक शासनकाल में कृषि की गतिहीनता के मुख्य कारण क्या थे?

Answer in Brief

Solution

  • औपनिवेशिक शासनकाल में कृषि की गतिहीनता के मुख्य कारण इस प्रकार थे
  1. पट्टेदारी प्रणाली - भारत में अंग्रेजों ने एक भू-राजस्व प्रणाली शुरू की जिससे जमींदारी प्रथा कहा गया। इसके अंतर्गत कृषकों, ज़मींदारों तथा सरकार के बीच एक त्रिकोणीय संबंध स्थापित किया गया। जमींदार जमीनों के स्थायी मालिक थे जिन्हें सरकार को एक तय राशि कर के रूप में देनी पड़ती थी। बदले में, वे कृषकों पर किसी भी दर पर कर लगा सकते थे। इस प्रथा ने कृषको की हालत भूमिहीन मज़दूरों जैसी कर दी। ऐसी परिस्थितियों में भी वे कार्यरत रहे क्योंकि अन्य कोई रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं थे।
  2. कृषि के व्यावसायिकरण का प्रत्यापन - कृषकों को खाद्यान्न फसलों को छोड़ वाणिज्यिक फसलों पर जाने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें ब्रिटेन में विकसित हो रहे कपड़ा उद्योग के लिए नील की आवश्यकता थी। कृषि के व्यावसायिकरण ने भारतीय कृषि को बाजार की अनिश्चिताओं से परीचित कराया। अब उन्हें अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ खरीदने के लिए नकदी की जरूरत थी। परंतु अपनी ऋणग्रस्तता के कारण उनके पास नकदी का सदा अभाव रहता था। इसने उन्हें कृषि से जुड़े रहने के लिए मजबूर कर दिया तथा जमींदारों और साहूकारों की दया पर निर्भर कर दिया।
  3. आधारिक संरचना की कमी - ब्रिटिश शासकों ने सिंचाई की सुविधाएँ बढ़ाने या तकनीकी विकास करने पर कोई ध्यान नहीं दिया।
  4. भारत का विभाजन - भारत के विभाजन ने भी भारतीय कृषि को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया। कलकत्ता की जूट मिलों तथा बंबई और अहमदाबाद के कपड़ा मिलों में कच्चे माल की कमी हो गई। पंजाब और सिंध जैसे अमीर खाद्यान्न क्षेत्र भी पाकिस्तान में चले जाने से खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो गया।
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औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत निम्न-स्तरीय आर्थिक विकास
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Chapter 1: स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था - अभ्यास [Page 14]

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NCERT Economics [English] Class 12
Chapter 1 स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था
अभ्यास | Q 3. | Page 14

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