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बाजार संतुलन की व्याख्या कीजिए। - Economics (अर्थशास्त्र)

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Question

बाजार संतुलन की व्याख्या कीजिए।

Answer in Brief

Solution

बाजार संतुलन से तात्पर्य उस स्थिति से है जब एक विशेष कीमत पर बाजार में माँगी गई मात्रा पूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है। बाजार माँग वक्र माँग के नियम के अनुसार बाईं से दाईं ओर नीचे की ओर
अधिपति अधिपूर्ति ढलान वाला होता है, क्योंकि वस्तु की कीमत तथा उसकी माँगी गई मात्रा में ऋणात्मक संबंध है। बाजार पूर्ति वक्र पूर्ति के नियम के है। अनुसार बाईं से दाईं ओर ऊपर की ढलानवाला होता है, क्योंकि वस्तु की कीमत और उसकी पूर्ति की गई मात्रा में धनात्मक संबंध होता है। अधिमाँग अतः दिये गए चित्र में माँग वक्र PD एक नीचे की ढलान वाला वक्र है और पूर्ति वक्र SS एक ऊपर की ओर ढलान वाला वक्र है। जहाँ पर DD और SS एक दूसरे को काटते हैं वहाँ पर बाजार संतुलन में होता है। इस बिन्दु पर Dn = Sn होता है। इस बिन्दु के अनुरूप संतुलन कीमत OP तथा संतुलन मात्रा पर निर्धारित हो जाती है। यदि बाजार कीमत OP से कम होगी तो बाजार में अधिमाँग होगी। यदि बाजार कीमत OP से अधिक होगी तो बाजार में अधिपूर्ति होगी।

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संतुलन, अधिमाँग, अधिपूर्ति
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Chapter 5: बाज़ार संतुलन - अभ्यास [Page 97]

APPEARS IN

NCERT Economics - Introductory Microeconomics [English] Class 11
Chapter 5 बाज़ार संतुलन
अभ्यास | Q 1. | Page 97

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qf = 8 + 3p क्योंकि p ≥ 20 
= 0 क्योंकि 0 ≤ p < 20

  1. P = 20 का क्या महत्व है?
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