English

भारत में पुराने तथा नए सामाजिक आंदोलनों में स्पष्ट भेद करना कठिन है | - Sociology (समाजशास्त्र)

Advertisements
Advertisements

Question

भारत में पुराने तथा नए सामाजिक आंदोलनों में स्पष्ट भेद करना कठिन है |

Answer in Brief

Solution

पुराने सामाजिक आंदोलन -

  • वर्ग आधारित-अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट।
  • उपनिवेशवाद के विरोध में आंदोलन।
  • राष्ट्रवादी आंदोलन तथा एक राष्ट्र के रूप में लोगों का एकजुट होना; जैसे-स्वतंत्रता आंदोलन।
  • राष्ट्रवादी आंदोलन, जिसने विदेशी शक्तियों तथा विदेशी पूँजी के विरोध में सक्रियता दिखाई। मुख्यतः साधन संपन्न तथा शासनहीन वर्गों के बीच संघर्ष से संबंधित। मुख्य मुद्दा-शक्तियों का पुनर्गठन। अर्थात शक्तियों पर नियंत्रण कर उसे शक्तिमान लोगों से छीनकर शक्तिहीन लोगों को देना। श्रमिकों ने पूँजीपतियों के विरुद्ध गतिशीलता दिखाई। महिलाओं का पुरुषों के प्रभुत्व के प्रति संघर्ष आदि।
  • राजनीतिक दलों के संगठनात्मक ढाँचे के अंदर क्रियाकलाप। जैसे - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राष्ट्रवादी आंदोलन का नेतृत्व किया। कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ चीन ने चीनी क्रांति का नेतृत्व किया।
  • राजनीतिक दलों की भूमिका की ही प्रधानता रहती थी तथा गरीब लोगों की बातें प्रभावपूर्ण तरीके से नहीं सुनी जाती थीं।
  • इनका संबंध सामाजिक असमानता तथा संसाधनों के असमान वितरण को लेकर था तथा इन आंदोलनों के यही प्रमुख तत्व हुआ करते थे।

नए सामाजिक आंदोलन -

  • नए सामाजिक आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दशकों में 1960-1970 के दशक के मध्य प्रकाश में आए।
  • इन आंदोलनों न केवल संकीर्ण वर्गीय मुद्दों को उठाया, बल्कि एक बड़े सामाजिक समूहों के विस्तृत तथा सर्वव्यापी मुद्दों को भी अपने आंदोलनों में शामिल किया।
  • अमेरिका की सेना वियतनाम के खिलाफ खूनी खेल में संलिप्त थी।
  • पेरिस में विद्यार्थियों ने श्रमिकों के दल की हड़तालों में शामिल होकर युद्ध के खिलाफ अपना विरोध जतलाया।
  • अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग के द्वारा नागरिक अधिकार आंदोलन चलाया गया।
  • अश्वेत शक्ति आंदोलन।
  • महिलाओं के आंदोलन। पर्यावरण संबंधी आंदोलन।
  • शक्तियों के पुनर्गठन के बजाय जीवन-स्तर के सुधार पर अधिक जोर। जैसे-सूचना का अधिकार, पर्यावरण की शुद्धता इत्यादि।
  • इस तरह के आंदोलन लंबे समय तक राजनीतिक दलों की छतरी के तले रहना पंसद नहीं करते। इसके बजाय नागरिक सामाजिक आंदोलनों से जुड़कर गैर सरकारी संगठनों का निर्माण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गैर सरकारी संगठन अधिक सक्षम, कम भ्रष्ट तथा स्वतंत्र होते हैं।
  • भूमंडलीकरण - लोगों की प्रतिबद्धता को आकार देना। संस्कृति, मीडिया, पारराष्ट्रीय कंपनियों, विधिक व्यवस्था-अंतर्राष्ट्रीय। इस कारण से कई सामाजिक आंदोलन अब अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं।
  • आवश्यक तत्व-पहचान की राजनीति, सांस्कृतिक समग्रता, आकांक्षाएँ।
shaalaa.com
सामाजिक आंदोलन
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 8: सामाजिक आंदोलन - प्रश्नावली [Page 159]

APPEARS IN

NCERT Sociology [Hindi] Class 12
Chapter 8 सामाजिक आंदोलन
प्रश्नावली | Q 3. | Page 159
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×