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भारतीय धर्मनिरपेक्षता का जोर धर्म और राज्य के अलगाव पर नहीं वरन उससे अधिक किन्ही बातों पर है। इस कथन को समझाइये। - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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Question

भारतीय धर्मनिरपेक्षता का जोर धर्म और राज्य के अलगाव पर नहीं वरन उससे अधिक किन्ही बातों पर है। इस कथन को समझाइये।

Long Answer

Solution

भारतीय धर्मनिरपेक्षता केवल धर्म और राज्य के बीच सम्बन्धविच्छेद पर बल देती है। अन्तरधार्मिक समानता भारतीय संकल्पना के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। भारतीय धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएँ इसकी प्रकृति को स्पष्ट करती हैं। सर्वप्रथम तो भारतीय धर्मनिरपेक्षता गहरी धार्मिक विविधता के सन्दर्भ में जन्मी थी। यह विविधता पश्चिमी आधुनिक विचारों और राष्ट्रवाद के आगमन से पूर्व की चीज है। भारत में पूर्व से ही अन्तर धार्मिक सहिष्णुता’ की संस्कृति मौजूद थी। हमें याद रखना। चाहिए कि ‘सहिष्णुता’ धार्मिक वर्चस्व की विरोधी नहीं है। सम्भव है सहिष्णुता में हर किसी को कुछ मौका मिल जाए, लेकिन ऐसी स्वतन्त्रता प्रायः सीमित होती है। इसके अतिरिक्त सहिष्णुता हम में उन लोगों को बर्दाश्त करने की क्षमता उत्पन्न करती है जिन्हें हम पसन्द नहीं करते हैं। यह उस समाज के लिए तो विशिष्ट गुण है जो किसी बड़े गृहयुद्ध से उभर रहा हो मगर शान्ति के समय में नहीं जब लोग समान मान-मर्यादा के लिए संघर्षरत हों।

पश्चिमी आधुनिकता के प्रभावस्वरूप भारतीय चिन्तन में समानता की अवधारणा उभरकर सामने आई। इसने हमें समुदाय में समानता पर जोर देने की दिशा में अग्रसर किया। इसने भारतीय समाज में मौजूद श्रेणीबद्धता को हटाने के लिए अन्तर सामुदायिक समानता के विचार को भी उद्घाटित किया। इस प्रकार भारतीय समाज में पूर्व से ही मौजूद धार्मिक विविधता और पश्चिम से आए विचारों के बीच अन्त:क्रिया प्रारम्भ हुई जिसके परिणामस्वरूप भारतीय धर्मनिरपेक्षता ने विशिष्ट रूप धारण कर लिया।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता ने अन्त:धार्मिक और अन्तरधार्मिक वर्चस्व पर एक साथ ध्यान केन्द्रित किया। इसने हिन्दुओं के अन्दर महिलाओं के उत्पीड़ने और भारतीय मुसलमानों अथवा ईसाइयों के अन्दर महिलाओं के प्रति भेदभाव तथा बहुसंख्यक समुदाय द्वारा अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों के अधिकारों पर उत्पन्न किए जा सकने वाले खतरों का समान रूप से विरोध किया। इस प्रकार, यह मुख्य धारा की पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता से पहली महत्त्वपूर्ण भिन्नता है। इसी से सम्बद्ध दूसरी भिन्नता यह है कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता का सम्बन्ध व्यक्तियों की धार्मिक स्वतन्त्रता से ही नहीं, अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतन्त्रता से भी है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसन्द का धर्म मानने का अधिकार है।

इसी प्रकार धार्मिक अल्पसंख्यकों को भी अपनी स्वयं की संस्कृति और शैक्षिक संस्थाएँ स्थापित करने का अधिकार है। एक अन्य भिन्नता भी है, चूंकि धर्मनिरपेक्ष राज्य को अन्तरधार्मिक वर्चस्व के मसले पर भी समान रूप से चिन्तित रहना है; अतः भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य समर्थित धार्मिक सुधार की जगह भी है और अनुकूलता भी। अन्त में, धर्मनिरपेक्षता का तात्पर्य शान्तिपूर्ण सह अस्तित्व अथवा सहिष्णुता से बहुत आगे तक जाता है।

इस मुहावरे का आशय विभिन्न धर्मों के प्रति सम्मान की भावना है, तो इसमें एक अस्पष्टता है, जिसे स्पष्ट करना आवश्यक है। भारतीय धर्मनिरपेक्षता विविध धर्मों में राज्य सत्ता के सैद्धान्तिक हस्तक्षेप की अनुमति प्रदान करती है। ऐसा हस्तक्षेप प्रत्येक धर्म के कुछ विशिष्ट पहलुओं के प्रति असम्मान प्रदर्शित करती है।

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भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ
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Chapter 8: धर्मनिरपेक्षता - प्रश्नावली [Page 124]

APPEARS IN

NCERT Political Science [Hindi] Class 11
Chapter 8 धर्मनिरपेक्षता
प्रश्नावली | Q 5. | Page 124
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