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Question
भाषा के प्रयोग से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद मिली होगी? इस पर चर्चा कीजिए। इन क्रियाकलापों के लिए विचार-सम्प्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था?
Solution
हम जानते हैं कि सभी जीवित प्राणियों में मनुष्य ही एक ऐसा जीव है जो कि भाषा का प्रयोग करता है। भाषा यादृच्छिक ध्वनि प्रतीकों की व्यवस्था है जिसके माध्यम से मनुष्य विचार-विनिमय करता है। भाषा के विकास पर कई विद्वानों के मत अलग-अलग हैं। उनकी मान्यताएँ निम्नलिखित हैं
- होमिनिड भाषा में हाव-भाव या अंगविक्षेप (हाथों को हिलाना या संचालन) शामिल था।
- उच्चरित भाषा से पूर्व गाने या गुनगुनाने जैसी मौखिक या अ-शाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
- मनुष्य की बोलने की क्षमता का विकास या प्रारम्भ आह्वान या बुलाने की क्रिया से हुआ जैसा कि नर-वानरों में प्रायः देखा जाता है।
उच्चरित भाषा यानी बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति कब हुई? यह निष्कर्ष देना भी कठिन कार्य है। विद्वानों की ऐसी विचारधारा है कि होमो हैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ विशेषताएँ थीं जिनके कारण वह बोलने में समर्थ हुआ होगा। इस प्रकार संभवतः भाषा का विकास 20 लाख वर्ष पूर्व हुआ। स्वर-तंत्र के विकास (लगभग 200,000 वर्ष पूर्व) और मस्तिष्क में हुए परिवर्तन से भाषा के विकसित होने में मदद मिली। भाषा और कला का सम्बन्ध घनिष्ठ है। भाषा के साथ-साथ कला लगभग 40,000-35,000 वर्ष पूर्व विकसित हुई। कला व भाषा दोनों ही सम्प्रेषण अर्थात् विचाराभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम हैं।
फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स (Lascaux) और शोवे (Chauvet) की गुफाओं में व उत्तरी स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की सैकड़ों चित्रकारियाँ पाई गई हैं, जोकि 30,000 से 12,000 वर्ष पूर्व चित्रित की गई थीं। इनमें गौरों (जंगली बैल), घोघों, पहाड़ी साकिन (बकरों), हिरनों, मैमथों, गैंडों, शेरों, भालुओं, चीतों, लकड़बग्घों व उल्लुओं के चित्र प्रमुख हैं।
प्रारम्भिक मानव के जीवन में शिकार का ज्यादा महत्त्व था। इसी कारण जानवरों की चित्रकारियाँ धार्मिक क्रियाओं, रस्मों और जादू-टोनों से जुड़ी होती थीं। ऐसी भी प्रतीत होता है कि चित्रकारी ऐसी रस्मों को अदा करने के लिए की जाती थी जिससे कि शिकार करने में सफलता प्राप्त हो।
विद्वानों की यह भी मान्यता है कि ये गुफाएँ ही प्रारम्भिक मानव की आपस में मिलने की जगहें थीं जहाँ पर छोटे-छोटे समूह एक-दूसरे से मिलते थे या एकत्रित होकर सामूहिक क्रियाकलाप करते थे। ऐसा भी जान पड़ता है। कि इन गुफाओं में ये समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते रहे हों व शिकार की तकनीक पर चर्चा करते रहे हों, और ये चित्रकारियाँ आगामी पीढ़ियों को इन तकनीकों से ज्ञान प्राप्त करने के लिए बनाई गई हों। अतः कहा जा सकता है कि चित्रकारी विचार-सम्प्रेषण का एक सशक्त माध्यम के रूप में प्रयोग हुआ है।
प्रारम्भिक समाज के बारे में जो विवरण दिया जाता है वह अधिकतर पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है। शिकार करने वाले वे खाद्य सामग्री तलाशने एवं बटोरने वाले समाज आज भी विश्व के अनेक भागों में मौजूद हैं। उन समाजों में हादज़ा समूह प्रमुख है।
कृषि के प्रारम्भ के साथ-साथ मानव ने अपनी झोंपड़ियों को खेतों के पास बनाना शुरू कर दिया। आरम्भ में मनुष्य लकड़ी व पत्तियों आदि की मदद से झोंपड़ी बनाता था, किन्तु बाद में वह कच्ची व पक्की ईंटों का भी प्रयोग घर बनाने में करने लगा था। प्राचीन झोंपड़ियों के अवशेष स्विट्जरलैंड (Switzerland) की एक झील में 1854 में मौजूद पाए गए।
स्थायी निवास स्थान बनाना मानव की महान उपलब्धि थी और यह सब भाषा के विकास के बिना असंभव था किन्तु भाषा ने इन सब क्रियाओं को संभव बना दिया। प्रारंभ में मानव निस्संदेह बहुत कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा, लेकिन ये ध्वनियाँ ही आगे चलकर भाषा के रूप में विकसित हो गई होंगी। अत: भाषा का विकास आधुनिक मानव के विकास का दिलचस्प पहलू है।