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Question
भाषा की चित्रात्मकता, लोकोक्तियों और मुहावरों का जानदार उपयोग तथा हिंदी-उर्दू के साझा रूप एवं बोलचाल की भाषा के लिहाज़ से यह कहानी अद्भुत है। कहानी में से ऐसे उदाहरण छाँट कर लिखिए और यह भी बताइए कि इनके प्रयोग से किस तरह कहानी का कथ्य अधिक असरदार बना है?
Solution
(क) चित्रात्मकता - वकीलों ने फैसला सुना और उछल पड़े। पंडित अलोपीदीन मुस्कराते हुए बाहर निकले। स्वजन-बांधवों ने रुपयों की लूट की। उदारता का सागर उमड़ पड़ा। उसकी लहरों ने अदालत की नींव तक हिला दी। जब वंशीधर बाहर निकले तो चारों ओर से उनके ऊपर व्यंग्य बाणों की वर्षा होने लगी।
(ख) लोकोक्तियाँ व मुहावरे - पूर्णमासी का चाँद, प्यास बुझना, फूले नहीं समाए, पंजे में आना, सन्नाटा छाना, सागर उमड़ना, हाथ मलना, सिर पीटना, जीभ जगना, शूल उठना, जन्म भर की कमाई, गले लगाना, ईमान बेचना। कलवार और कसाई के तगादे सहें। सुअवसर ने मोती दे दिया। घर में अँधेरा, मस्जिद में उजाला, धूल में मिलना, निगाह बाँधना, कगारे का वृक्ष।
(ग) हिंदी - उर्दू का साझा रूप-बेगरज को दाँव पर लगाना जरा कठिन है। इन बातों को निगाह में बाँध लो।
(घ) बोलचाल की भाषा - ‘कौन पंडित अलोपीदीन?’ ‘दातागंज के!’
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वृद्ध मुंशी
कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
वकील
कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
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पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो।
पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
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