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Question
भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवार्यता क्यों होती है?
Solution
भारत में तीन उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाए जाते हैं।
- औद्योगिक श्रमिकों के लिए CPI (आधार रूप में 1982)
- शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों (वर्ष 1984-1985 आधार) के लिए CPI
- कृषि श्रमिकों के लिए (वर्ष 1986-87 आधार) के लिए CPI
इनका नियमित रूप से हर महीने परिकलन होता है ताकि इन तीनों उपभोक्ताओं की व्यापक श्रेणियों के जीवन निर्वाह पर, खुदरा कीमतों में आए परिवर्तनों के प्रभावों का विश्लेषण किया जा सके औद्योगिक श्रमिकों तथा कृषि श्रमिकों के लिए CPI का प्रकाशन श्रमिक केंद्र शिमला द्वारा किया जाता है। केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन शहरी गैर-शारीरिक कमचारियों के लिए CPI संख्याओं का प्रकाशन करता है। ऐसा इसलिए आवश्यक है क्योंकि उनकी विशिष्ट उपभोक्ता टोकरी की वस्तुएँ असमान होती हैं।
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नीचे एक औद्योगिक केंद्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के बीच निम्नलिखित मदों पर प्रतिव्यक्ति मासिक व्यय को दर्शाया गया है। इन मदों का भार क्रमशः 75, 10, 5, 6 तथा 4 है। 1980 को आधार मानकर 2005 के लिये जीवन निर्वाह लगत सूचकांक तैयार कीजिए।
मद |
1980 में कीमत |
2005 में कीमत |
भोजन |
100 |
200 |
कपड़े |
20 |
25 |
ईंधन और प्रकाश |
15 |
20 |
घर का किराया |
30 |
40 |
विविध |
35 |
65 |
निम्नलिखित सारणी को ध्यानपूर्वक पढिए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए।
औद्योगिक उत्पादन आधार सूचकांक 1993-94
उद्योग | वजन में % | 1996-97 | 2003-2004 |
सामान्य सूचकांक | 100 | 130.8 | 189.0 |
खनन और उत्खनन | 10.73 | 118.2 | 146.9 |
विनिर्माण | 79.58 | 133.6 | 196.6 |
विद्युत | 10.69 | 122.0 | 172.6 |
यदि एक व्यक्ति का वेतन आधार वर्ष में 4,000 रुपये प्रतिवर्ष था और उसका वर्तमान वर्ष में वेतन 6,000 रुपये है। उसके जीवन-स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिये उसके वेतन में कितनी वृद्धि चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो।