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भूमिहीन कृषि मज़दूरों तथा प्रवसन करने वाले मजदूरों के हितों की रक्षा करने के लिए आपके अनुसार सरकार ने क्या उपाय किए हैं, अथवा क्या किए जाने चाहिए? - Sociology (समाजशास्त्र)

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Question

भूमिहीन कृषि मज़दूरों तथा प्रवसन करने वाले मजदूरों के हितों की रक्षा करने के लिए आपके अनुसार सरकार ने क्या उपाय किए हैं, अथवा क्या किए जाने चाहिए?

Answer in Brief

Solution

भूमिहीनों के संरक्षण के लिए उपाय

  • विधिक रूप से बंधुआ मजदूरी की समाप्ति - उत्तर प्रदेश तथा बिहार में बंधुआ मजदूरी की प्रथा, गुजरात में हेलपति तथा कर्नाटक में जोता व्यवस्था की भारत सरकार द्वारा कानूनी रूप से समाप्ति।
  • जमींदारी व्यवस्था का उन्मूलन - किसानों तथा राज्यों के बीच जमींदार बिचौलिए थे। सरकार ने बड़े ही प्रभावशाली तथा गहन रूप से अधिनियम को पारित कर इस व्यवस्था को खत्म कर दिया।
  • पट्टेदारी समाप्ति तथा नियमन अधिनियम - इस कानून ने बँटाईदारी व्यवस्था को हतोत्साहित किया। पश्चिम बंगाल तथा केरल, जहाँ की साम्यवादी सरकारें थीं, वहाँ पट्टेदारों को जमीन पर अधिकार दिए गए।
  • भूमि हदबंदी अधिनियम का प्रावधान - इस अधिनियम के अनुसार, भू-स्वामियों के द्वारा रखी जाने वाली जमीन की अधिकतम सीमा तय कर दी गई। अतिरिक्त भूमि की पहचान कर उसे भूमिहीनों के बीच वितरित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर दी गई। विनोबा भावे की भू-दान योजना ने इस कानून के क्रियान्वयन में मदद की। किंतु इस अधिनियम में बहुत सारी त्रुटियाँ भी हैं, जिनका कि निराकरण होना चाहिए।
    भूमिहीन श्रमिकों की दशाओं को सुधारने के लिए समुचित प्रयास किए जाने चाहिए तथा इस पूरे क्षेत्र को संगठित किया जाना चाहिए।
  • गाँवों की आर्थिक अवस्था को राज्यों के द्वारा सुधारा जाना चाहिए। गाँवों का संबंध शेष जगत् से अच्छी तरह से होना चाहिए। गाँवों में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाना चाहिए। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ गाँवों में मनोरंजन की सुविधाएँ भी प्रदान की जानी चाहिए ताकि श्रमिकों में पलायन की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। इसके लिए मनरेगा एक अच्छी पहल है।
  • भूमि की चकबंदी - भू-स्वामी किसानों को बिखरी हुई अथवा भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों के बजाय । एक या दो भूमि का बड़ा आकार वाला भाग दिया जाना चाहिए। इसे स्वैच्छिक अथवा अनिवार्य किसी भी रूप में कार्यान्वित किया जाना चाहिए। इससे किसानों की कार्यक्षमता में काफी वृद्धि होगी।
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मजदूरों का संचार (सरकुलेशन)
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Chapter 4: ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन - प्रश्नावली [Page 71]

APPEARS IN

NCERT Sociology [Hindi] Class 12
Chapter 4 ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन
प्रश्नावली | Q 2. | Page 71

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दिए गए गद्यांश को पढ़े तथा प्रश्न के उत्तर दें।

अघनबीघा में मजदूरों की कठिन कार्य-दशा, मालिकों के एक वर्ग के रूप में आर्थिक शक्ति तथा प्रबल जाति के सदस्य के रूप में अपरिमित शक्ति के संयुक्त प्रभाव का परिणाम थी। मालिकों की सामाजिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण पक्ष, राज्य में विभिन्न अंगों का अपने हितों के पक्ष में करवा सकने की क्षमता थी। इस प्रकार प्रबल तथा निम्न वर्ग के मध्य खाई को चौड़ा करने में राजनीतिक कारकों का निर्णयात्मक योगदान रहा है।

मालिक राज्य की शक्ति को अपने हितों के लिए कैसे प्रयोग कर सके, इस बारे में आप क्या सोचते हैं?


दिए गए गद्यांश को पढ़े तथा प्रश्न के उत्तर दें।

अघनबीघा में मजदूरों की कठिन कार्य-दशा, मालिकों के एक वर्ग के रूप में आर्थिक शक्ति तथा प्रबल जाति के सदस्य के रूप में अपरिमित शक्ति के संयुक्त प्रभाव का परिणाम थी। मालिकों की सामाजिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण पक्ष, राज्य में विभिन्न अंगों का अपने हितों के पक्ष में करवा सकने की क्षमता थी। इस प्रकार प्रबल तथा निम्न वर्ग के मध्य खाई को चौड़ा करने में राजनीतिक कारकों का निर्णयात्मक योगदान रहा है।

मजदूरों की कार्य दशा कठिन क्यों थी?


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