Advertisements
Advertisements
Question
ब्रिटिश भारत का बँटवारा क्यों किया गया?
Long Answer
Solution
- निम्नलिखित कारणों ने ब्रिटिश भारत के विभाजन में योगदान दिया
- ब्रिटिश कूटनीति - अधिकांश विद्वान इतिहासकारों के विचारानुसार भारत विभाजन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारण था- ब्रिटिश कूटनीति। ब्रिटिश प्रशासकों ने प्रारंभ से ही ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति का अनुसरण किया। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करने के लिए वे मुसलमानों की सांप्रदायिक भावनाओं को उत्तेजित करते रहे। 1905 ई० में बंगाल का विभाजन, 1906 ई० में मुस्लिम लीग की स्थापना और 1909 ई० में सांप्रदायिक चुनाव प्रणाली का प्रारंभ और विस्तार अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के ज्वलंत उदाहरण थे। ब्रिटिश प्रशासकों की इस नीति से मुसलमानों में सांप्रदायिक भावनाओं का विकास होने लगा। वे अपने हितों की रक्षा के लिए अपने लिए एक पृथक् राष्ट्र की माँग करने लगे, जिसकी चरम परिणति पाकिस्तान के निर्माण में हुई।
- मुस्लिम लीग का सांप्रदायिक दृष्टिकोण - मुस्लिम लीग के संकीर्ण सांप्रदायिक दृष्टिकोण ने हिन्दू-मुसलमानों में मतभेद उत्पन्न करने और अन्ततः पाकिस्तान के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। लीग ने ‘द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत’ का प्रचार किया और मुस्लिम जनसामान्य को यह विश्वास दिलाने का प्रयत्न किया कि अल्पसंख्यक मुसलमानों को बहुसंख्यक हिन्दुओं से भारी खतरा है। 1937 ई० में कांग्रेस द्वारा संयुक्त प्रांत में मुस्लिम लीग के साथ मिलकर मंत्रिमण्डल बनाने से इनकार कर दिए जाने पर लीग ने इस्लाम खतरे में है’ का नारा लगाया और कांग्रेस को हिन्दुओं की संस्था बताया। 1937 ई० में लीग के लखनऊ अधिवेशन में सांप्रदायिकता की अग्नि को और अधिक हवा देते हुए जिन्नाह ने कहा था-“अब हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा होगी और वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत होगा। कांग्रेस के झंडे को प्रत्येक व्यक्ति को स्वीकार करना पड़ेगा और उसका आदर करना पड़ेगा।” दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कांग्रेसी मंत्रिमण्डल द्वारा नवम्बर, 1939 ई० में त्यागपत्र दे दिए जाने पर मुस्लिम लीग अत्यधिक प्रसन्न हुई। 22 दिसम्बर, 1939 ई० को लीग ने संपूर्ण भारत में ‘मुक्ति दिवस’ मनाया। मार्च 1940 ई० में लाहौर अधिवेशन में लीग ने एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सीमित स्वायत्तता की माँग की गई। लीग ने कांग्रेस के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन का विरोध किया और 1946 ई० के चुनावों के पश्चात् ‘पाकिस्तान की स्थापना के लिए जोरदार आंदोलन प्रारंभ कर दिया। 16 अगस्त, 1946 ई० को लीग ने ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाया जिसके परिणामस्वरूप देश के विभिन्न भागों में भयंकर सांप्रदायिक दंगे हो गए। अतः देश को अनावश्यक रक्तपात से बचाने के लिए विभाजन अनिवार्य हो गया।
- कांग्रेस की लीग के प्रति तुष्टिकरण की नीति - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लीग के प्रति तुष्टिकरण की नीति अपनाई जो देश की अखंडता के लिए घातक सिद्ध हुई। कांग्रेस ने बार-बार लीग को संतुष्ट करने का प्रयत्न किया जिसके परिणामस्वरूप लीग की अनुचित माँगें दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगीं। मुस्लिम लीग के प्रति कांग्रेस की शिथिल एवं त्रुटिपूर्ण नीति से जिन्नाह को विश्वास हो गया था कि परिस्थितियों से विवश होकर कांग्रेस विभाजन के लिए तैयार हो जाएगी और अन्ततः ऐसा ही हुआ भी।
- सांप्रदायिक दंगे - 1946 ई० के चुनावों के पश्चात् लीग ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए प्रबल आंदोलन प्रारंभ कर दिया था। 16 अगस्त, 1946 ई० को लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाया जिसके परिणामस्वरूप बंगाल, बिहार और पंजाब में भयंकर हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो गए। संपूर्ण देश गृहयुद्ध की आग में जलने लगा। जैसे-जैसे सांप्रदायिक तनाव बढ़ता गया, भारतीय सिपाही और पुलिस वाले भी अपने पेशेवर प्रतिबद्धता को भूलकर हिन्दू, मुसलमान अथवा सिक्ख के रूप में आचरण करने लगे। अतः देश को भयंकर विनाश से बचाने के लिए कांग्रेस ने विभाजन को स्वीकार कर लेना ही श्रेयस्कर समझा।
- कांग्रेस की भारत को शक्तिशाली बनाने की इच्छा - मुस्लिम लीग की गतिविधियों से यह स्पष्ट हो चुका था कि लीग कांग्रेस से किसी भी रूप में समझौता अथवा सहयोग करने के लिए तैयार नहीं थी। कांग्रेस के प्रमुख नेता यह भली-भाँति समझ चुके थे कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भी लीग कांग्रेस के प्रत्येक कार्य में रुकावट डालेगी तथा तोड़-फोड़ की नीति अपनाएगी, जिसके परिणामस्वरूप देश निरन्तर दुर्बल होता जाएगा। अतः देश को विनाश से बचाने के लिए उन्होंने विभाजन को स्वीकार कर लेना अधिक उचित समझा।
- लॉड माउंटबेटन के प्रयास - मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान के निर्माण के लिए प्रत्यक्ष कार्यवाही प्रारंभ कर दिए जाने के कारण सम्पूर्ण देश में हिंसा की ज्वाला धधकने लगी थी। अत: लॉर्ड माउंटबेटन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल को विश्वास दिला दिया कि मुस्लिम लीग के बिना शेष भारत को शक्तिशाली और संगठित बनाना अधिक उचित होगा। कांग्रेसी नेताओं को गृहयुद्ध अथवा पाकिस्तान इन दोनों में से किसी एक का चुनाव करना था। उन्होंने गृहयुद्ध से बचने के लिए पाकिस्तान के निर्माण को स्वीकार कर लिया। इस प्रकार, अनेक कारणों के संयोजन ने देश के विभाजन को अपरिहार्य बना दिया था।
shaalaa.com
ऐतिहासिक मोड़
Is there an error in this question or solution?