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''ईमान! ऐसी कोई चीज़ मेरे पास हुई नहीं तो उसके डिगने का कोई सवाल नहीं उठता। यदि होता तो इतना बड़ा संग्रह बिना पैसा-कौड़ी के हो ही नहीं सकता।'' - के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? - Hindi (Elective)

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Question

''ईमान! ऐसी कोई चीज़ मेरे पास हुई नहीं तो उसके डिगने का कोई सवाल नहीं उठता। यदि होता तो इतना बड़ा संग्रह बिना पैसा-कौड़ी के हो ही नहीं सकता।'' - के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

Answer in Brief

Solution

लेखक के इस कथन का तात्पर्य है कि जो लोग ईमान की बात करते हैं, वह कभी न कभी बेईमान हो जाते हैं। लेखक ईमान जैसी चीज़ से ही स्वयं को मुक्त कर लेता है। वह कहता है कि उसके पास इस तरह की कोई चीज़ नहीं थी। अतः जो चीज़ उसके पास है ही नहीं, तो उसके खोने या चले जाने की स्थिति ही नहीं आ सकती। भाव यह है कि हमारे पास जब वह वस्तु होगी ही नहीं, तो हमें उसके खोने का डर ही नहीं रहेगा।
लेखक की यह बात उस कथन ने स्पष्ट होती है, जब उसने बोधिसत्व की मूर्ति को पाने के लिए बुढ़िया को 2 रुपए दिए थे। आगे चलकर उसे उस मूर्ति के 10 हज़ार मिल रहे थे। उसने बिना सोचे-समझे वे पैसे लेने से मना कर दिया। वह चाहता अपने दिए 2 रुपए तथा मेहनत को वसूल लेता। उसने ऐसा कुछ नहीं किया। अपने कार्य के प्रति वह पूर्ण रूप से समर्पित था। यदि वह इस तरह लालच में आकर अपने कार्य से धोखा करता, तो उसका संग्रहालय कभी खड़ा ही नहीं हो पाता। उसके पास अपार संपत्ति होती। उसने संग्रहालय को अपना सबकुछ माना और पूरी ईमानदारी से उसे खड़ा किया। यह संग्रहालय उसके परिश्रम और ईमानदारी को दर्शाता है।

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कच्चा चिट्ठा
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Chapter 2.03: ब्रजमोहन व्यास (कच्चा चिट्ठा) - प्रश्न-अभ्यास [Page 99]

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NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.03 ब्रजमोहन व्यास (कच्चा चिट्ठा)
प्रश्न-अभ्यास | Q 7. | Page 99

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