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Question
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'बाज़ार दर्शन' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि 'मन बंद न हो', 'मन खाली हो और मन खाली न हो' से लेखक क्या कहना चाहता है।
Short Answer
Solution
'बाज़ार दर्शन' पाठ में लेखक ने विभिन्न मानसिक अवस्थाओं पर प्रकाश डाला है, जो बाजार में लोगों के व्यवहार को प्रभावित करती हैं। मन बंद न होने की स्थिति में, जब हम भरे बाजार से गुजरते हैं, तो अक्सर अनावश्यक वस्तुएँ लेने की इच्छा उत्पन्न होती है।
मन खाली होने की स्थिति में लोग बिना सोचे-समझे खरीदारी करते हैं, जिससे कई अनावश्यक वस्तुएँ खरीद ली जाती हैं। जबकि मन खाली न होने पर व्यक्ति केवल आवश्यक और उपयोगी वस्तुएँ ही खरीदता है। यहाँ पाठकों को समझाने का प्रयास किया जाता है कि उनके मन में किस प्रकार की स्थितियाँ होती हैं, जब वे बाजार में होते हैं। इसके माध्यम से लेखक हमें बताना चाहते हैं कि बाजार की जादुई दुनिया किस प्रकार हमें अपनी ओर खींचकर प्रभावित करती है। यदि हम अपनी जरूरतों को स्पष्ट रूप से समझकर खरीदारी करें, तो इसका लाभ उठा सकते हैं। लेकिन यदि हम जरूरतों को तय किए बिना उसकी चमक-दमक में फँस जाते हैं, तो यह असंतोष, तृष्णा, और ईर्ष्या पैदा कर सकती है, जिससे हम व्यर्थ हो सकते हैं।
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