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'गिन्‍नी का सोना' पाठ में वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। -यह कथन किसके लिए कहा गया है और क्यों? इसका तात्पर्य समझाइए। - Hindi Course - B

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Question

'गिन्‍नी का सोना' पाठ में वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। -यह कथन किसके लिए कहा गया है और क्यों? इसका तात्पर्य समझाइए।

Answer in Brief

Solution

गाँधीजी व्यावहारिकता की कीमत जानते थे इसीलिए वे अपना विलक्षण आदर्श चला सके। लेकिन अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे। गिन्नी का सोना पाठ में यह कथन व्यापारियों और धनी लोगों के लिए कहा गया है। इसका तात्पर्य यह है कि वे लोग अपनी चालाकी और धोखाधड़ी से अधिक लाभ कमाने के लिए वस्त्र या धातु जैसी सामान्य वस्तुओं में कीमती धातु या संसाधनों का आभास कराते थे। वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। वे असल में ताँबे जैसी सस्ती धातु में थोड़ी मात्रा में सोना मिलाकर उसे अधिक मूल्यवान बना देते थे, जिससे उनकी वस्तुए बाजार में ऊँचे दामों पर बिकती थीं। इस कथन से यह समझ में आता है कि वे अपनी लाभ कमाने की प्रवृत्ति के कारण नैतिक मूल्यों की अनदेखी कर रहे थे और लोगों को धोखा दे रहे थे। वे आदर्श को व्यावहारिक्ता के स्तर तक गिरने नहीं देते थे बल्कि व्यावहारिकता को आदर्श के स्तर पर ऊँचा उठाते थे। यही उनकी विशेषता थी जो उन्हें असाधारण बनाए रखती थी।

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