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गरीबों की ऋण आवश्यकताएँ पूरी करने में अतिलघु साख व्यवस्था की भूमिका की व्याख्या करें। - Economics (अर्थशास्त्र)

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Question

गरीबों की ऋण आवश्यकताएँ पूरी करने में अतिलघु साख व्यवस्था की भूमिका की व्याख्या करें।

Answer in Brief

Solution

स्वयं सहायता समूह (एस.एच.जी.) जिन्हें अतिलघु साख कार्यक्रम भी कहा जाता है, ग्रामीण ऋण के संदर्भ में एक उभरती हुई घटना है।

  1. स्वयं सहायता समूह ग्रामीण परिवारों में बचत को बढ़ावा देते हैं। एस.एच.जी. छोटी बचतों को जुटाकर अपने अलग-अलग सदस्यों को ऋण के रूप में देने की पेशकश करते हैं।
  2. स्वयं सहायता समूहों द्वारा ऋण औपचारिक ऋण की तुलना में बेहतर है क्योंकि यह बिना कुछ गिरवी रखे ब्याज की एक सामान्य दर पर दिया जाता है।
  3. मार्च 2003 तक 7 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह कार्यशील थे।
  4. यह लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि इनसे निर्धनों को बिना कुछ गिरवी रखे कम ब्याज दरों पर न्यूनतम कानूनी औपचारिकताओं के साथ ऋण मिल जाता है।
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उत्पादक गतिविधियों का विविधीकरण
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Chapter 6: ग्रामीण विकास - अभ्यास [Page 118]

APPEARS IN

NCERT Economics [English] Class 12
Chapter 6 ग्रामीण विकास
अभ्यास | Q 3. | Page 118
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