English

घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते? - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

Question

घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते?

Long Answer

Solution

घड़ी का कार्य ही समय का ज्ञान करवाना है। वह समय बताती है इसलिए मूल्यवान है। लोग तभी उसका प्रयोग करते हैं। यदि घड़ी समय दिखाना बंद कर दे, तो लोगों के लिए घड़ी का मूल्य ही समाप्त हो जाए। इसी प्रकार धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध कराते हैं। मनुष्य के आरंभिक समय में धर्म का नामो-निशान नहीं था। अतः उसके चिह्न हमें नहीं मिलते। परन्तु जैसे-जैसे मानव सभ्यता ने विकास किया धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार उत्पन्न होने लगे। धर्म का अर्थ हर संप्रदाय ने अलग-अलग रूप में किया। यह परोपकार तथा मानवता पर आधारित था लेकिन इसमें आंडबरों ने स्थान बनाना आरंभ कर दिया। धर्म को अस्तित्व में लाया गया ताकि मनुष्य को बुराई की तरफ जाने से रोक जा सके। इसके साथ ही निराशा के समय में जीवन के प्रति आस्था और विश्वास उत्पन्न किया जा सके। पूरे विश्व में विभिन्न लोगों को मानने वाले लोग विद्यमान है। भारत में हिन्दु, जैन, बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम जाने कितने ही धर्म हैं। ये सब इस बात का प्रतीक है कि उस समय में लोगों ने इसे क्यों स्वीकारा और क्यों इसका उद्भव और विकास हुआ। हर समय में अलग-लग धर्माचार्य हुए हैं, उन्होंने इसकी अपने-अपने तरीकों से व्याख्या की है और इसे परिभाषित भी किया है। लोग इसे अपनी समझ के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में ले जाते हैं। उस समय इनका लोगों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और यही कारण है कि हम इस बात का समर्थन करते हैं।

shaalaa.com
सुमिरिनी के मनके
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 2.02: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके) - प्रश्न-अभ्यास [Page 85]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.02 पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 3. | Page 85

RELATED QUESTIONS

बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?


बालक ने क्यों कहा कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा?


बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?


बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटना अनुचित है, पाठ में ऐसा आभास किन स्थलों पर होता है कि उसकी प्रवृत्तियों का गला घोटा जाता है?


"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह लड्डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखानेवाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।


उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना अवसक है किन्तु उसका यानि या प्रदासनिक होना जरुरी नहीं लर्निग आउटकम के बारे में विचार कीजिये


लेखक ने धर्म का रहस्य जानने के लिए 'घड़ी के पुर्ज़े' का दृष्टांत क्यों दिया है?


'धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।' आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? धर्म संबंधी अपने विचार व्यक्त कीजिए।


धर्म अगर कुछ विशेष लोगों वेदशास्त्र, धर्माचार्यों, मठाधीशों, पंडे-पुजारियों की मुट्ठी में है तो आम आदमी और समाज का उससे क्या संबंध होगा? अपनी राय लिखिए।


'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

'वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है कि घड़ी के पुर्ज़े जानें, तुम्हें इससे क्या?'


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है, तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्ज़े सुधारना, तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते।'


वैदिककाल में हिंदुओं में कैसी लौटरी चलती थी जिसका ज़िक्र लेखक ने किया है।


'दुर्लभ बंधु' की पेटियों की कथा लिखिए।


जीवन साथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने के कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं।


मिट्टी के ढेलों के संदर्भ में कबीर की साखी की व्याख्या कीजिए-

पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार।
इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।।


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अपनी आँखों से जगह देखकर, अपने हाथ से चुने हुए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मट्टी और आग के ढेलों-मंगल, शनिश्चर और बृहस्पति की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है।'


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

'आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस के तेज पिंड से।'


जन्म भर के साथी का चुनाव मिटटी के ढेले पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है इसीलिए बेटी को शिक्छित होना अनिवार्य है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के सन्दर्भ में विचार कीजिये


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, ‘लड्डू’। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया।उसके बचने की आशा है क्योंकि वह ‘लड्डू’ की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

(1) ‘बच्चे के मुख पर रंग बदल रहे थे।’ इस पंक्ति के आधार पर आकलन करने से ज्ञात होता है कि बच्चे में उठ रहे भाव ______ के हैं। (1)

(क) सहृदयता
(ख) घबराहट
(ग) अंतरद्वंद्व
(घ) रोमांचकता

(2) गद्यांश के आधार पर कौन-सा वाक्य सही है? (1)

(क) काठ की अलमारी सदैव सिर दुखाती है।
(ख) शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य किया गया है।
(ग) बच्चों को पढ़ाना अत्यंत सहज कार्य है।
(घ) वृक्ष के हरे पतों का संगीत मधुर होता है।

(3) बालक द्वारा धीरे से लड्डू कहना दर्शाता है कि - (1)

(क) छोटी वस्तु भी पुरस्कार है।
(ख) कृत्रिमता का लबादा उतर गया।
(ग) कृत्रिमता का स्थायित्व संभव है।
(घ) लेखक का उद्देश्य पूरा हो गया।

(4) ‘अब मैंने सुख की साँस भरी’ के माध्यम से कह सकते हैं कि वह - (1)

(क) अत्यंत जागरूक नागरिक हैं।
(ख) बाल मनोविज्ञान से परिचित हैं।
(ग) स्तरानुसार शिक्षा के पक्षधर हैं।
(घ) अपने सुख की कामना करते हैं।

(5) गद्यांश हमें संदेश देता है कि - (1)

(क) स्वाभाविक विकास हेतु सहज एवं आनंदपूर्ण वातावरण होना चाहिए।
(ख) रटंत प्रणाली के कारण बच्चे की हृदय व्यथा चिंताजनक हो जाती है।(ग) बालक में निडरता थी तभी अपनी लड्डू की इच्छा को प्रकट कर पाया है।
(घ) अभिभावक एवं अध्यापकों को बालकों का चहुँमुखी विकास करना चाहिए।

(6) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए - (1)

कथन (A): लड़डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था।

कारण (R): बालक द्वारा लड्डू माँगा जाना वृक्ष के हरे पत्तों के समान इंगित करता है।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।


घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करने से लेखक के अभिप्राय को स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दिख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्‌डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्‌डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों पर मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×