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हाथ में संतोष की तलवार ले जो उड़ रहा है, जगत में मधुमास, उसपर सदा पतझर रहा है पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए- (i) मधुमास मनुजता -

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Question

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हाथ में संतोष की तलवार ले जो उड़ रहा है,

जगत में मधुमास, उसपर सदा पतझर रहा है,

दीनता अभिमान जिसका, आज उसपर मान कर लूँ।

उस कृषक का गान कर लूँ।।

चूसकर श्रम रक्‍त जिसका, जगत में मधुरस बनाया,

एक-सी जिसको बनाई, सृजक ने भी धूप-छाया,

मनुजता के ध्वज तले, आह्‌वान उसका आज कर लूँ।

उस कृषक का गान कर लूँ।।

(1) पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए- (2)

(i) मधुमास मनुजता
(ii) कृषक पतझर

(2) (i) निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए- (1)

  1. रचना करने वाला - ______
  2. वसंत ऋतु - ______

(ii) पद्यांश में आए ‘ध्वज’ शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए- (1)

  1. ______
  2. ______

(3) पद्यांश की प्रथम दो पंक्तियों का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए- (2)

Answer in Brief

Solution

(1) 

(i) मधुमास मधुर रुचिकर है, पर पतझर भी आता है।

(ii) कवी मनुजता के ध्वज के नीचे कृषक का आह्‌वान करना चाहता है।

(2) (i) 

  1. रचना करने वाला - सृजक
  2. वसंत ऋतु - मधुमास

(ii) 

  1. झंडा
  2. पताका

(3) कृषक के अभावों की कोई सीमा नहीं हैं। परंतु वह संतोष रूपी धन के सहारे अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। पूरे संसार में कैसा भी वसंत आए कृषक के जीवन में सदैव पतझर ही बना रहता है। अर्थात्‌ ऋतुएँ बदलती हैं, लोगों की परिस्थितियाँ बदलती हैं, परंतु कृषक के भाग्य में अभाव ही अभाव है।

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कृषक का गान
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