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Question
हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका पर दस वाक्य लिखिए।
Solution
डाकिए का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। पहले की तुलना में बेशक डाकिए अब कम ही दिखाई देते हैं परन्तु आज भी गाँवों में डाकिए का पहले की तरह ही चिट्ठियों को आदान-प्रदान करते हुए देखा जा सकता है। चाहे कितना मुश्किल रास्ता हो, ये हमेशा हमारी चिट्ठियाँ हम तक पहुँचाते आए हैं। आज भी गाँवों में डाकियों को विशेष सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। गाँव की अधिकतर आबादी कम पढ़ी लिखी होती है परन्तु जब अपने किसी सगे-सम्बन्धी को पत्र व्यवहार करना होता है तो डाकिया उनका पत्र लिखने में मदद करते है। आज चाहे शहरों में चिट्ठी के द्वारा पत्र-व्यवहार न के बराबर हो पर ये डाकिए हमारे स्मृति-पटल में सदैव निवास करेगें।
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तुम्हारे घर की बोली में इन शब्दों को क्या कहते हैं?
(क) गुड़िया
(ख) फुलवारी
(ग) नुक्कड़
(घ) चुनरी
मैं मेले से लाया हूँ इसको
हम मेले से लाए हैं इसको
ऊपर हमने देखा कि यदि 'मैं' के स्थान पर 'हम' रख दें तो हमें वाक्य में कुछ और शब्द भी बदलने पड़ जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दिए गए वाक्यों को बदलकर लिखो।
(क) मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती हूँ।
हम आठवीं कक्षा ______________ ।
(ख) मैं जब मेले में जा रहा था तब बारिश होने लगी
____________________________
(ग) मैं तुम्हें कुछ नहीं बताऊँगी।
________________________
तुम अपनी कक्षा में जब पहले दिन आए थे तो उस दिन क्या-क्या हुआ था? अपनी याद से अपने अनुभव को दस वाक्यों में लिखकर दिखाओ।
कवि अपनी कल्पना से शब्दों के हेर-फेर द्वारा कुछ चीज़ों के बारे में ऐसी बातें कह देता है, जिसे पढ़कर बहुत अच्छा लगता है। तुम भी अपनी कल्पना से किसी चीज़ के बारे में जैसी भी बात बताना चाहो, बता सकते हो। हाँ, ध्यान रहे कि उन बातों से किसी को कोई नुकसान न हो। शब्दों के फेर-बदल में तुम पूरी तरह से स्वतंत्र हो।
तुमने इस कविता में एक कवि, जिसने इस कविता को लिखा है, उसके बारे में जाना और इसी कविता में एक कवि कालिदास के बारे में भी जाना। अब तुम बताओ–
(क) तुम्हारे प्रदेश और तुम्हारी मातृभाषा में तुम्हारी पसंद के कवि कौन-कौन हैं?
(ख) उनमें से किसी एक कवि की कोई सुंदर-सी कविता, जो तुम्हें पसंद हो, को हिंदी में अनुवाद कर अपने साथियों को दिखाओ।
आजकल पुराने ज़माने की अपेक्षा किसान बहुत अधिक चीज़ों की खेती करने लगे हैं। खेती का स्वरूप बहुत विशाल हो गया है। पता करो कि आजकल भारत के लोग किन-किन चीज़ों की खेती करते हैं? अपने साथियों के साथ मिलकर एक सूची तैयार करो।
बसंत को ऋतुराज क्यों कहा जाता है? आपस में चर्चा कीजिए।
कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है।
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं।
होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूट जाते हैं।
एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले।” दूसरी पंक्ति में उसने यह कहकर अपने अस्तित्व को महत्त्व दिया है कि “मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।” यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं। उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं?
अपने गाँव लौटकर जब सुदामा अपनी झोंपड़ी नहीं खोज पाए तब उनके मन में क्या-क्या विचार आए? कविता के आधर पर स्पष्ट कीजिए।
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।
विपति कसौटी जे कसे तेई साँचे मीत||
इस दोहे में रहीम ने सच्चे मित्रा की पहचान बताई है। इस दोहे से सुदामा चरित की समानता किस प्रकार दिखती है? लिखिए।
''पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सो पग धोए''
ऊपर लिखी गई पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। इसमें बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर चित्रित किया गया है। जब किसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है। आप भी कविता में से एक अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण छाँटिए।
बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?
दूध की तुलना में श्रीकृष्ण कौन-से खाद्य पदार्थ को अधिक पसंद करते हैं?
दूसरे पद को पढ़कर बताइए कि आपके अनुसार उस समय श्रीकष्ण की उम्र क्या रही होगी?
श्रीकृष्ण गोपियों को माखन चुरा-चुराकर खाते थे इसलिए उन्हें माखन चुराने वाला भी कहा गया हैइसके लिए एक शब्द दीजिए
चमक - चमकना - चमकाना - चमकवाना
‘चमक’ शब्द के कुछ रूप ऊपर लिखे हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों का रूप बदलकर सही जगह पर भरो -
ज़रा सा रगड़ते ही हीरे ______ शुरू कर दिया।
नीचे लिखी पंक्ति पढ़ो। आपस में चर्चा करके इसके नीचे दिए गए प्रश्न के उत्तर दो -
"तेरे प्राणों में भरने को नया राग लाए हैं"
बादल ऐसा क्या लाए हैं जिससे किसान के प्राणों में नया राग भर जाएगा?
क्या होगा - अगर वर्षा बिलकुल ही न हो।