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हिमालय के आँगन में उसे, किरणों का दे उपहार उषा ने हँस अभिनंदन किया, और पहनाया हीरक हार। जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक व्योमतम पुंज हुआ तब नष्‍ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक। -

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Question

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हिमालय के आँगन में उसे, किरणों का दे उपहार

उषा ने हँस अभिनंदन किया, और पहनाया हीरक हार।

जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक

व्योमतम पुंज हुआ तब नष्‍ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।

विमल वाणी ने वीणा ली, कमल कोमल कर में सप्रीत

सप्तस्‍वर सप्तसिंधु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम संगीत।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए- (2)

(i)

(ii)

(2) (i) पद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए- (1)

  1. हीरों का हार - ______
  2. शोकरहित - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए- (1)

हिमालय के आँगन में उसे, किरणों का दे उपहार

(3) प्रस्तुत पद्यांश की किन्हीं दो पंक्तियों का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

Answer in Brief

Solution

(1)

(i)

(ii)

(2) (i) 

  1. हीरों का हार - हीरक हार
  2. शोकरहित - अशोक

(ii) हिमालय के आँगन में उसे किरण का दे उपहार।

(3) भारतवर्ष का गुणगान करते हुए कवि कहता है कि सूरज ने सबसे पहले अपनी किरणों की सौगात हिमालय के आँगन में बसे भारत की दी है। प्रातःकाल का समय, संपूर्ण भारत को अभिनंदन कर, इसे हीरों का हार पहनाता है।

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भारत महिमा
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