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हम यह किसे अर्थ में कह सकते हैं कि ‘असक्षमता’ जितनी शारीरिक है उतनी ही सामाजिक भी? - Sociology (समाजशास्त्र)

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Question

हम यह किसे अर्थ में कह सकते हैं कि ‘असक्षमता’ जितनी शारीरिक है उतनी ही सामाजिक भी?

Long Answer

Solution

असक्षम लोग इसलिए नहीं संघर्ष कर रहे हैं कि
वे भौतिक अथवा मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त हैं, बल्कि इसलिए कि समाज कुछ इस रीति से बना है। कि वह उनकी जरूरतों को पूरा नहीं करता।

  • भारतीय संदर्भ में निर्योग्यता आंदोलन की अग्रणी विचारक अनीता धई का मत है कि निर्योग्तया की तुलना राल्फ एलिसन के इनविजिबल मेन की स्थिति से की जा सकती है, जोकि अमेरिका में रहने वाले अफ्रीकी अमेरिकियों के विरुद्ध नस्लवाद का एक खुला अभियोग-पत्र है। निर्योग्यता/अक्षमता के कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं-
  1. जब भी कभी कोई अक्षम पुरुष/स्त्री के साथ कोई समस्या आती है तो यह मान लिया जाता है कि यह समस्या उसका/उसकी अक्षमता के कारण ही उत्पन्न हुई है।
  2. अक्षमता को एक जैविक कारक के रूप में समझा जाता है।
  3. अक्षम व्यक्ति को हमेशा एक पीड़ित व्यक्ति के रूप में देखा जाता है।
  4. यह मान लिया जाता है कि अक्षमता उस व्यक्ति के प्रत्यक्ष ज्ञान से जुड़ी है।
  5. निर्योग्यता का विचार यही दर्शाता है कि निर्योग्य/अक्षम व्यक्तियों को सहायता की आवश्यकता है।
  • भारतीय संस्कृति में शारीरिक पूर्णता का आदर किया जाता है तथा शारीरिक पूर्णता न होने की स्थिति को अवमान्यता, दोष तथा खराबी का लक्षण माना जाता है। इस स्थिति में पीड़ित अक्षम व्यक्ति को ‘बेचारा’ कहकर संबोधित किया जाता है।
  • इस तरह की सोच को मूल कारण वह सांस्कृतिक अवधारणा है जो कि अक्षम शरीर को भाग्य का परिणाम मानती है। इसके लिए भाग्य को दोषी ठहराया जाता है तथा पीड़ित को इसका शिकार माना जाता है। यह आम धारणा है कि अक्षमता पिछले कर्मों का फल है तथा इससे छुटकारा नहीं पाया सकता। भारतीय सांस्कृतिक संरचना में अक्षमता को व्यक्ति विशेष में स्वयं को कृत्य का परिणाम माना जाता है, जिसे उसे हर हाल में भुगतना पड़ता है। पौराणिक कथाओं में अक्षम व्यक्तियों के चरित्र को बहुत ही नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • अक्षमता’ इन सभी अवधारणाओं को चुनौती प्रदान करता है। अक्षम व्यक्ति अपनी जैविक अक्षमता के कारण विकलांग नहीं होते, बल्कि समाज के कारण होते हैं। 
  • अक्षमता के संबंध में सामाजिक अवधारणा का एक और पहलू भी है। अक्षमता तथा गरीबी के बीच गहरा संबंध होता है। कुपोषण, लगातार बच्चों को जन्म देने के कारण कमजोर हुई माताएँ, अपर्याप्त प्रतिरक्षण कार्यक्रम, भीड़-भाड़ वाले घरों में होने वाली दुर्घटनाएँ—ये सब गरीब लोगों की अक्षमता के कारण बनते हैं। इस तरह की घटनाएँ सुविधाजनक स्थितियों में रहने वालों की अपेक्षा गरीब लोगों में
    अधिक होती है।
  • अक्षमता के कारण समाज से कट जाने तथा आर्थिक तंगी से न केवल व्यक्ति को बल्कि उसके परिवार को भीषण गरीबी का सामना करना पड़ता है। व्यापक शैक्षणिक विमर्शों में अक्षमता को मान्यता नहीं दी गई है। ऐतिहासिक तथ्यों से यह प्रमाणित होता है कि शैक्षणिक संस्थाओं में अक्षमता के मुद्दे को दो भिन्न-भिन्न धाराओं में बाँट दिया गया है-एक धारा अक्षम छात्रों के लिए है तथा दूसरी धारा अन्य छात्रों के लिए।
  • अक्षम लोगों को शैक्षिक विमर्शों में शामिल करने की विचारधारा अभी भी प्रायोगिक प्रक्रिया में है, जो कि कुछ सरकारी स्कूलों तक ही सीमित है।
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विकलांगों का संघर्ष
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Chapter 5: सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप - प्रश्नावली [Page 117]

APPEARS IN

NCERT Sociology [Hindi] Class 12
Chapter 5 सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप
प्रश्नावली | Q 11 | Page 117
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