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Question
इस कविता में शाम के दृश्य को किसान के रूप में दिखाया गया है-यह एकरूपक है। इसे बनाने के लिए पाँच एकरूपताओं की जोड़ी बनाई गई है। उन्हें उपमा कहते हैं। पहली एकरूपता आकाश और साफ़े में दिखाते हुए कविता में 'आकाश का साफ़ा' वाक्यांश आया है। इसी तरह तीसरी एकरूपता नदी और चादर में दिखाई गई है, मानो नदी चादर-सी हो। अब आप दूसरी, चौथी और पाँचवी एकरूपताओं को खोजकर लिखिए।
Solution
कविता में एकरूपता बनाने वाली उपमाएँ-
(i) सूरज - चिलम
(ii) पहाड़ - किसान
(iii) आकाश - साफ़ा
(iv) अंधकार - भेड़ों का गल्ला
(v) पलाश का जंगल - अंगीठी
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बहुविकल्पी प्रश्न
कवि कैसा गीत नहीं लिख पा रहा है
क्या आपको दूसरों के इशारों पर काम करना अच्छा लगता है? इसका तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
कविता पढ़ो और जवाब दो-
(क) कविता की कौन-सी पंक्तियाँ सबसे अच्छी लगीं?
(ख) वे पंक्तियाँ क्यों अच्छी लगीं?
तुम्हें अपने आस-पास यदि लगे कि किसी को सचमुच में आज भी मान-सम्मान नहीं मिला है ओर उसको तुम मान-सम्मान दिलाना चाहते हो तो उनके नामों की सूची बनाओ।
अपनी सूची में से किसी एक के बारे में बताओ कि उसे मान-सम्मान कैसे मिल सकता है?
सही शब्द चुनकर वाक्य पूरा करो
बरसने लगा ________ यह पानी।
इस पंक्ति से बारिश के बारे में क्या पता चलता है?
नमूना → | सूरज की माँ ने उसको बुला लिया। |
ऐसा लगता है कि आसमान में सूरज नज़र नहीं आ रहा होगा। |
आँगन में तलवार चल रही है।
रिक्त स्थान भरो
न, मत और नहीं का इस्तेमाल किसी काम के मनाही के लिए किया गया है। तुम नीचे लिखे वाक्यों में 'न', 'मत', 'मना' और 'नहीं' भरो।
(क) तुम वहाँ __________जाओ।
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समय को रहा दिखाना
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जनता को एक करना
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तारों की चाल बदल देना
स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण - सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
'बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।'- इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-
(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन-किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए
पेड़ों के झुनझुने
बजने लगे;
लुढ़कती आ रही है।
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।
‘जल को मछलियों से कोई प्रेम नहीं होता’ इसका क्या प्रमाण है?
रहीम मनुष्य को धरती से क्या सीख देना चाहता है?
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए-
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी,
तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिए।
• इन पंक्तियों में ऐंठ’ और ‘समझ’ शब्दों का प्रयोग सजीव प्राणी की भाँति हुआ है। कल्पना कीजिए, यदि ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ किसी नाटक में दो पात्र होते तो उनको अभिनय कैसा होता?
'बंसीवारे ललना', 'मोरे प्यारे','लाल जी', कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं
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