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इतिहास में स्पीति का वर्णन नहीं मिलता। क्यों? - Hindi (Core)

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Question

इतिहास में स्पीति का वर्णन नहीं मिलता। क्यों?

Answer in Brief

Solution

स्पीति की भौगोलिक स्थिति विचित्र है। यहाँ आवागमन के साधन नहीं हैं। यह पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ है। साल में आठ-नौ महीने बर्फ रहती है तथा यह क्षेत्र शेष संसार से कटा रहता है। इन दुर्गम रास्तों को लाँघने का साहस किसी राजा या शासक ने नहीं किया। यहाँ की आबादी बेहद कम है तथा जनसंचार के साधन का अभाव है। मानवीय गतिविधियों के कारण यहाँ इतिहास नहीं बना। इसका जिक्र सिर्फ राज्यों के साथ जुड़े रहने पर ही आता है। यह क्षेत्र प्राय: स्वायत्त ही रहा है।

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स्पीति में बारिश
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Chapter 1.06: स्पीति में बारिश - अभ्यास [Page 77]

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NCERT Hindi - Aaroh Class 11
Chapter 1.06 स्पीति में बारिश
अभ्यास | Q 1. | Page 77

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स्पीति के लोग जीवनयापन के लिए किन कठिनाइयों का सामना करते हैं?


लेखक माने श्रेणी का नाम बौद्धों के माने मंत्र के नाम पर करने के पक्ष में क्यों है?


ये माने की चोटियाँ बूढ़े लामाओं के जाप से उदास हो गई हैं- इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने युवा वर्ग से क्या आग्रह किया है?


वर्षा यहाँ एक घटना है, एक सुखद संयोग है – लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?


स्पीति अन्य पर्वतीय स्थलों से किस प्रकार भिन्न है?


स्पीति में बारिश का वर्णन एक अलग तरीके से किया गया है। आप अपने यहाँ होने वाली बारिश का वर्णन कीजिए।


स्पीति के लोगों और मैदानी भागों में रहने वाले लोगों के जीवन की तुलना कीजिए। किन का जीवन आपको ज्यादा अच्छा लगता है और क्यों?


स्पीति में बारिश एक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें यात्रा के दौरान किए गए अनुभवों, यात्रा-स्थलों से जुड़ी विभिन्न जानकारियों का बारीकी से वर्णन किया गया है। आप भी अपनी किसी यात्रा का वर्णन लगभग 200 शब्दों में कीजिए।


लेखक ने स्पीति की यात्रा लगभग तीस वर्ष पहले की थी। इन तीस वर्षों में क्या स्पीति में कुछ परिवर्तन आया है? जानें, सोचें और लिखें।


पाठ में से दिए गए अनुच्छेद में क्योंकि, और, बल्कि, जैसे ही, वैसे ही, मानो, ऐसे, शब्दों का प्रसंग करते हुए उसे दोबारा लिखिए –

लैंप की लौ तेज़ की। खिड़की का एक पल्ला खोला तो तेज हवा का झोंका मुँह और हाथ को जैसे छीलने लगा। मैंने पल्ला भिड़ा दिया। उसकी आड़ से देखने लगा। देखा कि बारिश हो रही थी। मैं उसे देख नहीं रहा था। सुन रहा था। अँधेरा, ठंड और हवा का झोंका आ रहा था। जैसे बरफ़ का अंश लिए तुषार जैसी बूंदें पड़ रही थीं।


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