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‘जूझ’ शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता हैं। - Hindi (Core)

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Question

‘जूझ’ शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता हैं।

Answer in Brief

Solution

जूझ का साधारण अर्थ है जूझना अथवा संघर्ष करना। यह उपन्यास अपने नाम की सार्थकता को सिद्ध करता है। उपन्यास का कथानायक भी जीवनभर स्वयं से और अपनी परिस्थितियों से जूझता रहता है। यह शीर्षक कथानायक के संघर्षशील वृत्ति का परिचय देता है। हमारे कथानायक में संघर्ष की भावना है। वह संघर्ष करने के लिए मजबूर है लेकिन उसका यह संघर्ष ही उसे एक दिन पढ़ा-लिखा इंसान बना देता है। इस संघर्ष में भी उसने आत्मविश्वास बनाए रखा है। यद्यपि परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध होती हैं तथापि वह अपने आत्मविश्वास के बल इस प्रकार की परिस्थितियों से जूझने में सफल हो जाता है। वास्तव में कथानक की संघर्षशीलता ही उसकी चारित्रिक विशेषता है। उपन्यास के शीर्षक से यही केंद्रीय विशेषता उजागर होती है।

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जूझ
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Chapter 2: जूझ (आनंद यादव) - अभ्यास [Page 34]

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NCERT Hindi - Vitaan Class 12
Chapter 2 जूझ (आनंद यादव)
अभ्यास | Q 1. | Page 34

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