कभी भी किसी का मन टूटने न देना। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि हमें अपने व्यवहार, शब्दों और कार्यों से किसी के भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए। दूसरों के मन को आहत करने से रिश्ते टूटते हैं और विश्वास समाप्त हो जाता है। हमें हमेशा दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और ऐसा व्यवहार करना चाहिए जिससे किसी को दुख न हो। सहानुभूति, संवेदना और समझदारी से ही सच्चा मानव बनना संभव है।