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Question
कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
मनोज का रिक्शा से मंडी जाना - जल्दबाजी में बदुआ रिक्शे में भूलना - थोड़ी सब्जी लेकर घर लौटना - तनाव में - रात नौ बजेदरवाजे पर रिक्शेवाले की दस्तक - पता ढूँढ़ते घर आना और बटुआ लौटाना - शीर्षक। |
Solution
ईमानदारी
मनोज नाम का एक व्यक्ति रामपुर गाँव में रहता था। वह हमेशा सुबह जल्दी उठता था और घर की सारे काम करके उसे मंडी जाना था, परन्तु उसे घर से निकलने में ही देर हो गयी थी। उसने एक रिक्शा लिया और चल पड़ा। रिक्शेवाले को देने के लिए उसने पहले ही पैसे निकालके बटुआ रख दिया। पर उसके जल्दबादी के कारन बटुआ रिक्शे में गिर पड़ा, परन्तु इसका उसे कोई ध्यान नहीं रहा।
जब उसने मंडी पहुँचकर कुछ खरीदारी के पैसे चुकाने चाहे तो उसे मालूम हुआ कि उसका बटुआ खो गया है। वह कुछ सब्जी ही ले पाया और दुखी मन से अपने घर पहुँचा। वह बटुआ घूम जाने से वह बहुत तनाव में था। क्योंकि उसमें जरूरत की जानकारी थी। रात के नौ बजे थे और दरवाजे पर किसने दस्तक दी। उसने सोचा अभी इस समय में कौन आया होगा। मनोज ने दरवाजा खोला तो रिक्शावाला आया था जो मुझे सुबह मुझे मंडीतक छोड़ दिया था। वह बहुत मुश्किल से मेरा पता ढूँढ़ते-ढूँढ़ते घर आया था। उसने बोला आपका बटुआ मेरे रिक्शा में गिर गया था वो लौटने आया हूँ।बढुआ पाकर मनोज बेहद खुश हुआ। मनोज ने अपना बटुआ लिया और रिक्शावाले को धन्यवाद बोला। रिक्शावाले ने बटुआ सौपकर वह अपने रास्ते चला गया। मैंने सोचा कि सचमुच ईमानदारी आज भी जिंदा है।
सीख - ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।