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किसी धातु में (27°C) पर एक इलेक्ट्रॉन का प्रारूपी दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए और इसकी तुलना धातु में दो इलेक्ट्रॉनों के बीच औसत पृथक्य से कीजिए जो लगभग 2 x 10-10 m दिया गया है। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

किसी धातु में (27°C) पर एक इलेक्ट्रॉन का प्रारूपी दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए और इसकी तुलना धातु में दो इलेक्ट्रॉनों के बीच औसत पृथक्य से कीजिए जो लगभग 2 x 10-10 m दिया गया है।

Numerical

Solution

E = `1/2 mv^2 = 3/2 "kT"  => v = sqrt("3kT"/m)`

`therefore lambda = "h"/"p" = "h"/sqrt(3 "mkT")`    ....[m = 9.1 × 10-31 kg, k = 1.38 × 10-23 J/mole K]

∴ इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य

`lambda = (6.62 xx 10^-34)/(sqrt(3 xx 9.1 xx 10^-31 xx 1.38 xx 10^-23 xx 300)) = 62 xx 10^-10` m = 62 Å

जबकि दो इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी r0 = 2 × 10-10 m

∴ `lambda/"r"_0 = 62/2` = 31

अर्थात दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य, इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी की 31 गुनी है।

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प्रकाश-विद्युत प्रभाव प्रायोगिक अध्ययन
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Chapter 11: विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - अभ्यास [Page 413]

APPEARS IN

NCERT Physics [Hindi] Class 12
Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
अभ्यास | Q 11.36 | Page 413

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  1. न्यूट्रॉन की किस गतिज ऊर्जा के लिए दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य 1.40 x 10-10 m होगा?
  2. एक न्यूट्रॉन, जो पदार्थ के साथ तापीय साम्य में है और जिसकी 300 K पर औसत गतिज ऊर्जा \[\frac{3}{2}\]kT है, का भी दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।

एक इलेक्ट्रॉन गन जिसका संग्राहक 100V विभव पर है, एक कम दाब (~10-2 mm Hg) पर हाइड्रोजन से भरे गोलाकार बल्ब में इलेक्ट्रॉन छोड़ती है। एक चुम्बकीय-क्षेत्र जिसका मान 2.83 x 10-4 T है, इलेक्ट्रॉन के मार्ग को 12.0 cm त्रिज्या के वृत्तीय कक्षा में वक्रित कर देता है। (इस मार्ग को देखा जा सकता है क्योंकि मार्ग में गैस आयन किरण-पुंज को इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करके और इलेक्ट्रॉन प्रग्रहण के द्वारा प्रकाश उत्सर्जन करके फोकस करते हैं; इस विधि को परिष्कृत किरण-पुंज नली विधि कहते हैं। आँकड़ों से \[\frac{e}{m}\] का मान निर्धारित कीजिए।


गैसें सामान्य दाब पर कुचालक होती हैं, परन्तु बहुत कम दाब पर चालन प्रारम्भ कर देती हैं। क्यों?


प्रत्येक धातु का एक निश्चित कार्य-फलन होता है। यदि आपतित विकिरण एकवर्णी हो तो सभी प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन समान ऊर्जा के साथ बाहर क्यों नहीं आते हैं? प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों का एक ऊर्जा वितरण क्यों होता है?


एक इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा तथा इसका संवेग इससे जुड़े पदार्थ-तरंग की आवृत्ति तथा इसके तरंगदैर्घ्य के साथ निम्न प्रकार सम्बन्धित होते हैं

E = hv, p = `"h"/lambda`

परन्तु  λ का मान जहाँ भौतिक महत्त्व का है, के मान (और इसलिए कला चाल 22 को मान) का कोई भौतिक महत्त्व नहीं है। क्यों?


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