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Question
कृषि क्षेत्रक में लागू किए गए भूमि सुधार की आवश्यकता और उनके प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
Answer in Brief
Solution
- भारत में बिचौलियों की एक बड़ी सेना थी जैसे जमींदार, महालावार, रैयत आदि जो वास्तविक किसान से किराया वसूल करते थे और उसका एक हिस्सा भू-राजस्व के रूप में सरकार के पास जमा कराते थे। वे किसानों के साथ दासों जैसा व्यवहार करते थे।
- आवश्यकता
a. बिचौलियों के उन्मूलन का उपाय वास्तविक जोतक और किसान के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए किया गया।
b. बंजर भूमि, जंगल आदि राज्य सरकार को हस्तांतरित करने के लिए।
c. भूमि वितरण में समानता लाने के लिए।
d. किसानों को भूमि का मालिक बनाने के लिए। - प्रकार
a. जमींदारी प्रथा का उन्मूलन- सरकार और किसान के बीच में सीधा संपर्क स्थापित करने के लिए जमींदारी प्रथा का उन्मूलन कर दिया गया ताकि किसानों के शोषण को दूर किया जा सके। इन बिचौलियों ने किसानों पर भारी शुल्क लगाए। परंतु सिंचाई सुविधाओं, भंडारण सुविधाओं, ऋण सुविधाओं, विपणन सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
b. किरायेदारी सुधार- ये निम्नलिखित से संबंधित थे
1. किराया विनियमन
2. कार्यकाल सुरक्षा
3. किरायेदारों के लिए स्वामित्व अधिकार
c. अधिकतम भूमि सीमा अधिनियम- इस अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यक्ति की कृषि भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी गई।
कृषि के पुनगठन का संबंध
1. भूमि के पुनर्वितरण
2. भूमि चकबंदी
3. सहकारी खेती से है।
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कृषि
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1. | प्रधानमंत्री | (क) | अधिक अनुपात में उत्पादन देने वाले बीज |
2. | सकल घरेलू उत्पाद | (ख) | आयात की जा सकने वाली मात्रा |
3. | कोटा | (ग) | योजना आयोग के अध्यक्ष |
4. | भूमि - सुधार | (घ) | किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित की गई सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य। |
5. | उच्च उत्पादकता वाले बीज | (ड़) | कृषि क्षेत्र की उत्पादकता वृद्धि के लिए किए सुधार। |
6. | सहायिकी | (च) | उत्पादक कार्यों के लिए सरकार द्वारा दी गई मौद्रिक सहायता। |