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Question
‘क्रोध हर जीव में दुबका होता है’, इसपर अपना मत लिखिए।
Solution
जंगली जानवरों के भी अपनी बोली-भाषा और अधिकार हुआ करते हैं। कई बार इन्हीं बातों के लिए उनमें झगड़े भी हुआ करते हैं। उसी प्रकार इंसानों में भी अपने-अपने अधिकारों के लिए विवाद होते हैं। क्रोध एक भाव है जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में जकड़ लेता है। सामान्य तौर पर क्रोध आना स्वाभाविक है, लेकिन क्रोध अगर तीव्र हो और हर छोटी-बड़ी बात पर आए तो यह विनाश का सूचक बन जाता है। धर्म शास्त्रों और पौराणिक कथाओं में तो क्रोध को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। क्रोध व्यक्ति से न सिर्फ दूसरों का बल्कि खुद का भी नुक़सान करवाता है। गलती और क्रोध एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर आप से कोई गलती हो जाए तो आपको अकारण ही क्रोध आने लगता है और अगर आप गुस्से में हैं तो गलती पर गलती करते चले जाते हैं। ऐसे में जब क्रोध शांत होता है तब आप जान पाते हैं कि आपके द्वारा की गई गलतियों का क्या प्रभाव पड़ रहा है या पड़ने वाला है। क्रोध को तुरंत जाहिर कर देना फिर भी ठीक माना जाता है उस परिस्थिति से कि आप क्रोध को अपने भीतर पाल रहे हैं, क्योंकि मन में पल रहा क्रोध कब विकराल रूप लेले इसका आपको अनुमान तक नहीं लग पाता और दूसरों का अहित होते होते उसका नकारात्मक प्रभाव आप पर और आपके जीवन पर भी दिखने लग जाता है।
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