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Question
कुछ लोगों को ऐसा क्यों लगता था कि बँटवारा बहुत अचानक हुआ?
Solution
कुछ विद्वानों के विचारानुसार देश का विभाजन बहुत अचानक हुआ। हमें याद रखना चाहिए कि भारत विभाजन की आधार-भूमि में प्रारंभ से ही ब्रिटिश कूटनीति कार्य कर रही थी। ब्रिटिश प्रशासकों ने प्रारंभ में ही ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति का अनुसरण किया। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को दुर्बल बनाने के लिए वे मुसलमानों की सांप्रदायिक भावनाओं को उत्तेजित करते रहे। 1942 ई० के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की व्यापकता से यह स्पष्ट हो गया था कि अंग्रेज़ अधिक समय तक भारत को अपने अधीन नहीं रख सकेंगे। और उन्हें भारत को स्वतंत्र करना ही होगा। इस आंदोलन के कारण इंग्लैंड के विभिन्न राजनैतिक दल भारतीय समस्या पर गंभीरतापूर्वक विचार करने लगे और अंग्रेजों का भारत छोड़ना निश्चित हो गया। किन्तु कूटनीति के कुशल खिलाड़ी अंग्रेज़ भारत को एक शक्तिशाली नहीं अपितु दुर्बल और विखंडित देश के रूप में छोड़ना चाहते थे।
अतः वे अचानक विभाजन के लिए तैयार हो गए। हमें याद रखना चाहिए कि उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुलता वाले क्षेत्रों के लिए सीमित स्वायत्तता की माँग से विभाजन होने के बीच का काल केवल 7 वर्ष का था। सम्भवतः किसी को भी यह ठीक से पता नहीं था कि पाकिस्तान के निर्माण का क्या अभिप्राय होगा और उसका भविष्य में जनसामान्य के जीवन पर क्या प्रभाव होगा? । उल्लेखनीय है कि 1947 ई० में अपने मूल स्थान को छोड़कर नए स्थान पर जाने वाले अधिकांश लोगों को विश्वास था कि शान्ति स्थापित होते ही वे अपने मूल स्थान में लौट आएँगे। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि प्रारंभ में मुस्लिम नेता भी एक सम्प्रभु राज्य के रूप में पाकिस्तान की माँग के प्रति गंभीर नहीं थे। सम्भवतः स्वयं जिन्नाह भी सौदेबाजी में पाकिस्तान की सोच का प्रयोग एक पैंतरे के रूप में करना चाहते थे। इसके द्वारा वे एक ओर, सरकार द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को दी जाने वाली रियायतों पर रोक लगा सकते थे और दूसरी ओर, मुसलमानों के लिए अधिकाधिक रियायतें प्राप्त कर सकते थे।
उल्लेखनीय है कि मार्च 1940 ई० में लाहौर अधिवेशन में लीग ने जो प्रस्ताव प्रस्तुत किया, उसमें उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में केवल सीमित स्वायतत्ता की माँग की गई थी। इस अस्पष्ट से प्रस्ताव में विभाजन अथवा पाकिस्तान का उल्लेख कहीं भी नहीं किया गया था। इस प्रस्ताव के लेखक पंजाब के प्रीमियर (Premier) और यूनियनिस्ट पार्टी के नेता सिंकदर हयात खान ने 1 मार्च, 1941 ई० को पंजाब असेम्बली में यह स्पष्ट किया था कि वह ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा के विरोधी हैं, जिसमें “यहाँ मुस्लिम राज और शेष स्थानों पर हिन्दू राज होगा…..” इस प्रस्ताव के केवल सात वर्ष बाद ही देश का विभाजन हो गयी। इसलिए कुछ लोगों को लगा कि देश का विभाजन बहुत अचानक हुआ।