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कवि रहीम के नीतिपरक दोहे सुनिए तथा किन्हीं पाँच दोहों का भावार्थ लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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Question

कवि रहीम के नीतिपरक दोहे सुनिए तथा किन्हीं पाँच दोहों का भावार्थ लिखिए।

Answer in Brief

Solution

1) रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर न जुरै, जुरै गांठ पड़ जाय।।

भावार्थ: रहीम प्रेम को बहुत नाजुक मानते हैं। वह कहते हैं कि प्रेम बहुत ही कोमल और मूल्यवान होता है, जो दो व्यक्तियों के अहसास से जुड़ा हुआ होता है। यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर आसानी से नहीं जुड़ता और यदि जुड़ भी जाए तो कहीं न कहीं गांठ पड़ ही जाती है फिर पहले जैसी प्रेम की भावना नहीं रह जाती। रिश्तों में एक दूरी आ ही जाती है।

2) रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेइ, जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ।।

भावार्थ: रहीम कहते हैं कि मन की पीड़ा किसी भी हाल में किसी के सामने प्रकट न होने दें, लेकिन इन आँसुओं का क्या, ये तो ऐसे ही होते हैं, हर किसी के सामने ढरक ही जाते हैं और हृदय की वेदना सहज ही बाहर आ जाती है। इन आँसुओं को बहने से रोकते हुए हित-अनहित का विचार अवश्य ही करना चाहिए। 

3) रहिमन कठिन चितान ने, चिंता कोधित चेत। चिता दहति निर्जीव को, चिंता जीव समेत।।

भावार्थ: रहीम कहते हैं कि जो चिंता है, वह चिता से भी कहीं अधिक जलाने वाली है क्योंकि चिता तो मरे हुए को जलाती है जबकि चिंता जिंदा व्यक्ति को तिल-तिलकर जलाती है। चिंता का जड़ से ही सफाया होना चाहिए। यह समूल दु:खों की जननी है। कहने का भाव है- चिंता किसी बात को लेकर हो तो उसके निदान का उपाय कीजिए वरना आप जलकर राख हो जाएँगे।

4) रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहै कोय।।

भावार्थ: रहीम कहते हैं कि अपने मन की पीड़ा को दूसरों से छुपा कर ही रखना चाहिए, क्योंकि जब आपका दर्द किसी अन्य व्यक्ति को पता चलता है तो वे लोग उसका मज़ाक ही उड़ाते हैं। कोई भी आपके दर्द को कम नहीं कर सकता। 

5) ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय।।

भावार्थ: अपने अंदर के अहंकार को निकालकर ऐसी बात करनी चाहिए जिसे सुनकर दुसरों को और खुद को ख़ुशी हो।

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क्‍या सचमुच आजाद हुए हम ?
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Chapter 1.13: क्‍या सचमुच आजाद हुए हम ? - स्वाध्याय [Page 53]

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Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1.13 क्‍या सचमुच आजाद हुए हम ?
स्वाध्याय | Q १ | Page 53
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