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Question
कविता (संध्या सुंदरी) की अंतिम छह पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
सुलाती उन्हें अंक पर अपने,
दिखलाती फिर विस्मृति के वह अगणित मीठे सपने।
अद्र्धरात्रि की निश्चलता में हो जाती जब लीन,
कवि का बढ़ जाता अनुराग,
विरहाकुल कमनीय कंठ से,
आप निकल पड़ता तब एक विहाग !
Solution
कवि 'निराला' कहते हैं कि संध्या जब थके-हारे लोगों को अमृत का एक प्याला पीला देती है, तब उन्हें अपनी गोद में लेकर सुला लेती है | सोने के बाद थके-हारे लोगों को संध्या भूले-बिसरे असंख्य मीठे सपने दिखती है | आधी रात के समय जब सब कुछ स्थिर हो जाता है, तब कवि का प्रेम बढ़ जाता है, तथा उसके विरहाकुल सुरीले गले से संगीत का एक राग निकल पड़ता है |
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प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :
उचित क्रमांक लिखकर जोड़ियाँ मिलाइए :
अ | उत्तर | आ |
नूपुर | अगणित | |
अधर | कमनीय | |
मीठे सपने | नीरवता | |
कंठ | मधुर-मधुर | |
सखी | मेघमय | |
आसमान | कोमलता | |
कली | रुन-झुन, रुन-झुन |
कृति पूर्ण कीजिए :
कविता (संध्या सुंदरी) में प्रयुक्त संगीत से संबंधित शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर लिखिए :
मीठे सपने दिखाने वाली - ______
उत्तर लिखिए :
अभिषेक करने वाला - ______
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार का नाम
२. रचना की विधा
३. पसंदीदा पंक्ति
४. पसंद होने का कारण
५. रचना से प्राप्त प्रेरणा