English

क्या शरीरक्रियात्मक उद्धेलन सांवेगिक अनुभव के पूर्व या पश्चात्‌ घटित होता है ? व्याख्या कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

क्या शरीरक्रियात्मक उद्धेलन सांवेगिक अनुभव के पूर्व या पश्चात्‌ घटित होता है ? व्याख्या कीजिए।

Long Answer

Solution

संवेगों के शरीरक्रियात्मक आधार :

संजय नौकरी पाने के लिए परेशान है। उसने साक्षात्कार के लिए अच्छी तैयारी की है और आत्म-विश्वास का अनुभव कर रहा है। जैसे ही वह साक्षात्कार कक्ष में जाता है और साक्षात्कार प्रारंभ होता है, वह अत्यधिक तनाव में आ जाता है। उसके हाथ-पाँव ठंडे पड़ जाते हैं, उसका हृदय जोर-जोर से धड़कने लगता है और वह उपयुक्त तरीके से उत्तर देने में असमर्थ हो जाता है।

यह सब क्यों हुआ? किसी ऐसी घटना के बारे में सोचने का प्रयास कीजिए जो इससे मिलती हुई हो और जिसका अनुभव स्वयं आपने किया हो। क्या आप उसका कोई संभाव्य कारण सोच सकते हैं।

जब हम किसी संवेग का अनुभव करते हैं तो अनेक शरीर क्रियात्मक परिवर्तन होते हैं। जब हम उत्तेजित, भयभीत अथवा क्रोधित होते हैं तो इन शारीरिक परिवर्तनों को चिह्नित करना अपेक्षाकृत सरल होता है। जब हम किसी वस्तु के बारे में उत्तेजित या क्रुद्ध होते हैं तो अनुभव करते हैं कि हमारी हृदय गति बढ़ जाती है, सिर चकराने लगता है, पसीना आने लगता है तथा हाथ-पाँव में कंपन होने लगता है। परिष्कृत उपकरणों की सहायता से उन शरीर क्रियात्मक परिवर्तनों का यथार्थ मापन किया जा सकता है।

जो न मतसाय की अनुभूति के साथ उत्पन्न होते हैं। स्वायत्त तथा कायिक तंत्रिका तंत्र दोनों ही संवेगात्मक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। संवेग का अनुभव तंत्रिका शरीर क्रियात्मक सक्रियकरण की श्रृंखला पर निर्भर करता है, जिसमें चेतक, अधश्लेतक, उपवल्कुटीय व्यवस्था तथा प्रमस्तिष्कीय वल्कुट महत्त्वपूर्ण रूप से अंतर्निहित होते हैं। वे व्यक्ति जिनके मस्तिष्क के इन क्षेत्रों में व्यापक क्षति हो जाती है, उनकी संवेगात्मक योग्यताएँ दोषपूर्ण होते हुए देखी गई हैं। प्रयोगों में शिशुओं तथा वयस्कों में भी विभिन्न मस्तिष्क के क्षेत्रों में चयनात्मक सक्रियकरण, भिन्न-भिन्न संवेगों का उद्वेलन प्रदर्शित करता है।

संवेग के शरीर क्रियात्मक सिद्धांतों में सबसे पुराने सिद्धांतों में से एक जेम्स (James,1884) द्वारा दिया गया था और लैंगे

(Lange) ने उसका समर्थन किया था, अतः इसे जेम्स-लैंगे सिद्धांत (James-Lange theory) के नाम से जाना जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार पर्यावरणी उद्दीपक विसेरा या अंतरांग (आंतरिक अंग; जैसे - हृदय तथा फेफड़े) में शरीर क्रियात्मक अनुक्रियाएँ उत्पन्न करते हैं, जो कि पेशीय गति से संबद्ध होते हैं। उदाहरण के लिए, अप्रत्याशित अत्यंत तीव्र शोर के द्वारा चौंकना, आंतरांगी तथा पेशीय अंगों में सक्रियकरण को उत्पन्न करता है, जिसका अनुसरण करता है संवेगात्मक उद्बेलन। दूसरे शब्दों में, जेम्स- लैंगे सिद्धांत का तर्क यह है कि आपके शारीरिक परिवर्तनों का आपके द्वारा किया गया प्रत्यक्षण- जैसे किसी घटना के बाद साँस का तेज चलना, हृदय की तेज धड़कन, टाँगों का दौड़ना, संवेगात्मक उद्बेलन को उत्पन्न करता है। इस सिद्धांत का निहितार्थ यह है कि विशिष्ट घटनाएँ या उद्दीपक विशिष्ट शरीर क्रियात्मक परिवर्तनों को उत्तेजित करती हैं तथा व्यक्ति इन परिवर्तनों का जिस प्रकार से प्रत्यक्षण करता है, संवेगों की अनुभूति उसी का परिणाम होती है।

shaalaa.com
संवेगों के शरीरक्रियात्मक आधार
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 9: अभिप्रेरणा एवं संवेग - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 195]

APPEARS IN

NCERT Psychology [Hindi] Class 11
Chapter 9 अभिप्रेरणा एवं संवेग
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 5. | Page 195
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×