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माँग वक्र में शिफ्ट का कीमत पर अधिक तथा मात्रा पर कम प्रभाव होता है, जबकि फर्मों की संख्या स्थिर रहती है। स्थितियों की तुलना करें जब निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति हो। व्याख्या करें। - Economics (अर्थशास्त्र)

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Question

माँग वक्र में शिफ्ट का कीमत पर अधिक तथा मात्रा पर कम प्रभाव होता है, जबकि फर्मों की संख्या स्थिर रहती है। स्थितियों की तुलना करें जब निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति हो। व्याख्या करें।

Long Answer

Solution

जब फर्मों की संख्या स्थिर रहती है तो माँग वक्र में शिफ्ट का कीमत पर अधिक तथा मात्रा पर कम प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति में माँग वक्र दाईं ओर नीचे की ओर ढलान वाला तथा पूर्ति वक्र दाईं ओर ऊपर की ओर ढलान वाला होता है। इसे नीचे दिए वक्र में दिखाया गया है। जब माँग वक्र DD से D1D1 की ओर खिसक गया तो नई संतुलन कीमत OP1 तथा नयी संतुलन मात्रा OQ1 पर निर्धारित हो गई।
दूसरी स्थिति जब फर्मों को निर्बाध प्रवेश तथा विकास की। स्वतंत्रता हो तो पूर्ति वक्र पूर्णतया बेलोचदार होता है। ऐसे में माँग में वृद्धि होनेपर संतुलन कीमत समान रहती है, परन्तु संतुलन मात्रा बढ़ जाती हैं इसे नीचे दिए चित्र में दिखाया गया है। माँग वक्र DD में वृद्धि पर यह D1D1 पर खिसक जाता है। इसके 6 खिसकने से संतुलन कीमत समान रहती है, परन्तु संतुलन मात्रा OQ1 पर निर्धारित हो जाती है।
अतः यह कहना बिल्कुल उचित है कि माँग वक्र में शिफ्ट का कीमत पर अधिक तथा मात्रा पर कम प्रभाव होता है जब फर्मों की संख्या स्थिर रहती है उसकी तुलना में जब निर्बाध प्रवेश तथा । बहिर्गमन की अनुमति हो।

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संतुलन, अधिमाँग, अधिपूर्ति
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Chapter 5: बाज़ार संतुलन - अभ्यास [Page 98]

APPEARS IN

NCERT Economics - Introductory Microeconomics [English] Class 11
Chapter 5 बाज़ार संतुलन
अभ्यास | Q 21. | Page 98

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क्या होगा यदि बाजार में प्रचलित मूल्य है?

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बाजार फर्मों की संख्या स्थिर होने पर तथा निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की स्थिति में माँग वक्र के स्थानान्तरण का संतुलन पर प्रभाव की तुलना कीजिए।


संतुलन कीमत तथा मात्रा किस प्रकार प्रभावित होते हैं जब ।

  1. माँग तथा पूर्ति वक्र दोनों, समान दिशा में शिफ्ट होते हैं?
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एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में श्रम की इष्टतम मात्रा किस प्रकार निर्धारित होती है?


मान लीजिए, एक पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार में वस्तु X की माँग तथा पूर्ति वक्र निम्न प्रकार दिए गए हैं।

q= 700 - p
q= 500 + 3p क्योंकि p ≥ 15
= 0 क्योंकि 0 ≤ p < 15
मान लीजिए कि बाजार में समरूपी फर्मे हैं। 15 ₹ से कम, किसी भी कीमत पर वस्तु x की बाजार पूर्ति के शून्य होने के कारण की पहचान कीजिए। इस वस्तु के लिए संतुलन कीमत क्या होगी? संतुलन की स्थिति में
की कितनी मात्रा का उत्पादन होगा?


फर्मों को वस्तु का उत्पादन करने के निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति देते हैं। यह भी मान लीजिए कि बाजार समानरूपी फर्मों से बना है जो वस्तु x का उत्पादन करती है। एक अकेली फर्म का पूर्ति वक्र निम्न प्रकार है-

qf = 8 + 3p क्योंकि p ≥ 20 
= 0 क्योंकि 0 ≤ p < 20

  1. P = 20 का क्या महत्व है?
  2. बाजार में x के लिए किस कीमत पर संतुलन होगा? अपने उत्तर का कारण बताइए।
  3. संतुलन मात्रा तथा फर्मों की संख्या का परिकलन कीजिए।

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q= 1000 - p, q= 700 + 2p

  1. संतुलन कीमत तथा मात्रा ज्ञात कीजिए।
  2. अब मान लीजिए कि नमक के उत्पादन के लिए प्रयुक्त एक आगत की कीमत में वृद्धि हो जाती है और नया पूर्ति वक्र है:
    q= 400 + 2p 
    संतुलन कीमत तथा मात्रा किस प्रकार परिवर्तित होती है? क्या परिवर्तन आपकी अपेक्षा के अनुकूल है?
  3. मान लीजिए, सरकार नमक की बिक्री पर 3 ₹ प्रति इकाई कर लगा देती है। यह संतुलन कीमत तथा मात्रा को किस प्रकार प्रभावित करेगा?

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