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मानो को क्यों लग रहा था कि किसी ने उसकी पक्की ईंटों के मकान को धराशाई कर दिया है? - Hindi (Elective)

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Question

मानो को क्यों लग रहा था कि किसी ने उसकी पक्की ईंटों के मकान को धराशाई कर दिया है?

Answer in Brief

Solution

मानो अपने ईंटों से बने घर की कल्पना को साकार करने के लिए जी-जान से जुटी हुई थी। सुकिया भी उसका पूरा साथ दे रहा था। लाल-लाल ईंटों से बना अपना घर बाहर भले न बन पाया हो लेकिन सुकिया के सपनों में प्रतिक्षण साकार था। उसने पसीना बहाकर ईंटें थापी थीं। बड़ी लगन से उन्हें दीवार के रूप में खड़ा किया था। जब उसने उन्हीं ईंटों की दुर्दशा देखी तो वह मर्माहत हो उठी। उसे लगा जैसे वे ईंटें नहीं गिराई गई हैं बल्कि किसी आतताई ने उन ईंटों से बना उसका पक्का मकान ही गिरा दिया था। उसकी सारी मेहनत, उसके सपने, कल्पना में साकार अपना घर, सब कुछ सूबेसिंह ने तहस-नहस कर डाला था। 

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खानाबदोश
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Chapter 1.6: खानाबदोश - प्रश्न-अभ्यास [Page 77]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antar Class 11
Chapter 1.6 खानाबदोश
प्रश्न-अभ्यास | Q 6. | Page 77

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