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Question
'मानवता जीवन का मूल आधार है', स्पष्ट कीजिए।
Solution
मनुष्य का एक ही कर्म व धर्म है और वह है मानवता। हम इस दुनिया में इंसान बनकर आए हैं तो सिर्फ इसलिए कि हम मानव सेवा कर सकें। पूरे विश्व में ईश्वर ने हम सभी को एक-सा बनाया है। फर्क बस, स्थान और जलवायु के हिसाब से हमारा रंग-रूप, खान-पान और जिंदगी जीने का अलग-अलग तरीका है। आत्मभाव से हर मनुष्य एक समान है। मानवजीवन का उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति करना होता है। वर्तमान में हमने मानवता को भुलाकर अपने को जाति-धर्म, गरीब-अमीर जैसे कई बंधनों में बांध लिया है और उस ईश्वर को अलग-अलग बांट दिया है। धर्म एक पवित्र अनुष्ठान भर है, जिससे चेतना का शुद्धिकरण होता है। धर्म मनुष्य में मानवीय गुणों के विचार का स्रोत है, जिसके आचरण से वह अपने जीवन को चरितार्थ कर पाता है। मानवता के लिए न तो पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है और न ही भावना की, बल्कि सेवा भाव तो मनुष्य के आचरण में होना चाहिए। जो गुण व भाव मनुष्य के आचरण में न आए, उसका कोई मतलब नहीं रह जाता है। इससे हम अपने चारों ओर लोगों के प्रति प्रेम, स्नेह, सहयोग, समर्पण रखते हैं। ऐसे ही यदि हमारे चारों ओर लोगों में भी मानवता है तो वह भी हमारे प्रति प्रेम, स्नेह, सहयोग की भावना रखेंगे। हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं। एक जैसे ही तत्व सबके भीतर हैं। जिस दिन यह सच्ची बात हमारे मन में स्थापित हो जाएगी, तो फिर सभी भेद मिट जाएँगे और तब हम इंसानियत की राह पर अग्रसर होकर भाई-चारा स्थापित करने लगेंगे।
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