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‘मैं आकाश बोल रहा हूँ’, इसपर अपने विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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Question

‘मैं आकाश बोल रहा हूँ’, इसपर अपने विचार लिखिए।

Answer in Brief

Solution

हमारी पृथ्वी से बाहर के वातावरण अथवा अंतरिक्ष को ही आकाश कहते है। मैं दिन में नीला, सफ़ेद या लाल रंग का, वही रात में काले रंग का दिखाई देता हूँ। मुझे आसमान के नाम से भी कहा जाता है। मेरे आसपास बहुत ही सुंदर-सुंदर और छोटे-बड़े तारे प्रस्ताव करते है। रात के समय में चाँद भी बहुत खूबसूरत दिखाई देता है। पक्षी आकाश में उड़ना बहुत पसंद करते है। बारिश के मौसम में इंद्रधनुष भी आकाश में दिखाई देता है। इसप्रकार सुबह शाम को अर्थात सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मैं बहुत सुंदर दिखाई देता है।

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पृथ्‍वी-आकाश
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Chapter 1.1: पृथ्‍वी-आकाश - स्वाध्याय [Page 44]

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Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1.1 पृथ्‍वी-आकाश
स्वाध्याय | Q १ | Page 44

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‘पृथ्वी की व्यथा’ अपने शब्दों में बताओ।


उचित मिलान कीजिए:

(अ)  (ब)
चंद्रमा उजियारा
लोहित  झरना
प्रकाश मिठास
सूर्य चाँदनी
  गगन

अन्य ग्रह पर जीवसृष्‍टि है, आप वहाँ पर अपना घर बसाना चाहते हैं तो किस प्रकार की सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं, लिखिए।


पाठ (पृथ्वी-आकाश) में इसके लिए प्रयुक्त शब्द हैं:

कपास में ______


पाठ (पृथ्वी-आकाश) में इसके लिए प्रयुक्त शब्द हैं:

ज्वार के दाने में ______


पाठ (पृथ्वी-आकाश) में इसके लिए प्रयुक्त शब्द हैं:

कमलिनी में ______


विशेषताएँ लिखकर प्रवाह तक्ता पूर्ण कीजिए:


पाठ (पृथ्वी-आकाश) में प्रयुक्त पाँच विलोम शब्द जोड़ियाँ लिखिए।


‘प्राकृतिक संसाधन मानव के लिए वरदान है, इसका उचित उपयोग आवश्यक है’ इसपर अपने विचार लिखिए।


उचित शब्‍द लिखकर प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:


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