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Question
मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा क्यों देते हैं?
Solution
मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा सा मक्खन बिखरा देते थेऐसा वे जानबूझकर नहीं करते थेकृष्ण छोटे थेमक्खन चुराने की जल्दबाजी तथा साथियों को मक्खन देते समय ऐसा हो जाता था
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(संकेत - बस, बस-बस, बस इतना सा)
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(ख) उनमें से किसी एक कवि की कोई सुंदर-सी कविता, जो तुम्हें पसंद हो, को हिंदी में अनुवाद कर अपने साथियों को दिखाओ।
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(ख) सागर में उठती ऊँची-ऊँची लहरें।
(ग) सुगंध फैलाता हुआ फूल।
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कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है।
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं।
होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूट जाते हैं।
कविता में ऐसी कौन-सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है? स्पष्ट कीजिए।
पक्षी और बादल की चिट्ठियों के आदान-प्रदान को आप किस दृष्टि से देख सकते हैं?
द्वारका से खाली हाथ लौटते समय सुदामा मार्ग में क्या-क्या सोचते जा रहे थे? वह कृष्ण के व्यवहार से क्यों खीझ रहे थे? सुदामा के मन की दुविधा को अपने शब्दों में प्रकट कीजिए।
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चमक - चमकना - चमकाना - चमकवाना
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‘चमक’ शब्द के कुछ रूप ऊपर लिखे हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों का रूप बदलकर सही जगह पर भरो -
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