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Questions
मौखिक इतिहास के फ़ायदे/नुकसानों की पड़ताल कीजिए। मौखिक इतिहास की पद्धतियों से विभाजन के बारे में। हमारी समझ को किस तरह विस्तार मिलता है?
मौखिक इतिहास के लाभों और हानियों का वर्णन कीजिए। ऐसे किन्हीं चार स्रोतों का उल्लेख कीजिए जिनसे विभाजन का इतिहास स्रोतों में पिरोया गया है।
Solution
इतिहास के पुनर्निर्माण में हमें अनेक स्रोतों से सहायता मिलती है, जिनमें मौखिक स्रोतों का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है। यद्यपि मौखिक इतिहास के अपने लाभ और हानियाँ हैं तथापि यह सत्य है कि मौखिक इतिहास की पद्धतियाँ विभाजन के विषय में हमारी समझ को विस्तार प्रदान करती हैं।
- मौखिक इतिहास के लाभ
- मौखिक इतिहास हमें विभाजन से संबंधित अनुभवों एवं स्मृतियों को और अधिक सूक्ष्मता से समझने का अवसर प्रदान करता है।
- मौखिक इतिहास के आधार पर इतिहासकार उन भावनात्मक समस्याओं एवं कष्टों का, जिनसे जनसामान्य को विभाजन के दौर में गुजरना पड़ा, का सजीव वर्णन करने में समर्थ हुए हैं। हमें याद रखना चाहिए कि सरकारी दस्तावेजों का संबंध नीतिगत एवं दलगत विषयों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से होता है। अतः उनसे इस प्रकार की जानकारियों को प्राप्त करना संभव नहीं हो पाता।
- विभाजन के परिणामस्वरूप सामान्य लोगों को किन हालातों से गुजरना पड़ा अथवा विभाजन को लेकर जनसामान्य के क्या अनुभव रहे, इसका पता हमें मौखिक इतिहास से ही लगता है। सरकारी रिपोर्टों एवं फाइलें तथा महत्त्वपूर्ण सरकारी अधिकारियों के व्यक्तिगत लेख इस पर पर्याप्त प्रकाश नहीं डालते।
- सामान्यतः हम जिस इतिहास का अध्ययन करते हैं, वह सामान्य लोगों से संबंधित विषयों पर कोई महत्त्वपूर्ण प्रकाश नहीं डालता, क्योंकि उनके जीवन एवं कार्यों को प्रायः पहुँच के बाहर अथवा महत्त्वहीन मानकर नज़रअंदाज कर दिया जाता है। किन्तु मौखिक इतिहास इन विषयों पर महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालता है। उदाहरण के लिए, मौखिक स्रोतों से हमें पता लगता है कि विभाजन के परिणामस्वरूप सम्पन्न लोगों को विपन्नता के दौर से गुजरना पड़ा। घर की। चारदीवारी में सुख का जीवन जीने वाली महिलाओं को पेट भरने के लिए मज़दूरों के रूप में काम करना पड़ा। बड़े-बड़े व्यापारियों को अपना और परिवार का पेट भरने के लिए छोटी-मोटी नौकरियाँ करनी पड़ीं और शरणार्थियों का जीवन जीने के लिए विवश होना पड़ा।
- मौखिक इतिहास विभाजन के दौरान जनसामान्य और विशेष रूप से महिलाओं द्वारा झेली जाने वाली पीड़ा को | समझने में हमें महत्त्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है।
- मौखिक इतिहास की हानियाँ
- अनेक इतिहासकारों के विचारानुसार मौखिक जानकारियाँ सटीक नहीं होतीं। अतः उनसे घटनाओं के जिस क्रम का निर्माण किया जाता है, उसकी यथार्थता संदिग्ध होती है।
- इतिहासकारों के मतानुसार मौखिक विवरणों का संबंध केवल सतही विषयों से होता है। यादों में संचित किए जाने वाले छोटे-छोटे अनुभवों से इतिहास की विशाल प्रक्रियाओं के कारणों का पता लगाने में कोई महत्त्वपूर्ण सहायता | नहीं मिलती।
- व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर किसी सामान्य निष्कर्ष पर पहुँचना सरल नहीं होता।
- मौखिक इतिहास में वास्तविक अनुभवों के साथ निर्मित स्मृतियाँ भी जुड़ जाती हैं। प्रायः कुछ दशक बाद लोग किसी घटना के विषय में काफी कुछ भूल जाते हैं।
- सामान्यतः विभाजन के दौरान कड़वे अनुभवों से गुज़रने वाले लोग आपबीती के विषय में बात करने को तैयार नहीं होते। उदाहरण के लिए, बलात्कार की पीड़ा को झेलने वाली एक महिला को किसी अज़नबी के सामने अपने उन दर्दनाक अनुभवों को व्यक्त करने के लिए तैयार करना कोई सरल कार्य नहीं है।
- मौखिक जनकारियों से घटनाओं का तिथिबद्ध विवरण प्राप्त करना कठिन है।
विभाजन विषयक समझ को विस्तार प्रदान करना
उल्लेखनीय है कि मौखिक इतिहास की पद्धतियाँ विभाजन के विषय में हमारी समझ को विस्तार प्रदान करती हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि विभाजन के मौखिक इतिहास को संबंध केवल सतही विषयों से नहीं है। विभाजन से। संबंधित मौखिक बयानों को न तो अविश्सनीय कहा जा सकता है और न ही महत्त्वहीन। मौखिक विवरणों अथवा बयानों से निकलेवाले निष्कर्षों की तुलना अन्य साक्ष्यों से निकलनेवाले निष्कर्षों से करके एक सामान्य एवं विश्वसनीय निष्कर्ष पर सरलतापूर्वक पहुँचा जा सकता है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि विभाजन के दौरान जनसामान्य को और विशेष रूप से महिलाओं को जिस पीड़ा से गुजरना पड़ा उसे समझने के लिए हमें अनेक रूपों में मौखिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। उदाहरण के लिए, सरकारी रिपोर्टों से यह तो सरलतापूर्वक पता लगाया जा सकता है कि भारतीय और दला-बदली की गई।
किन्तु सरकारी रिपोर्टों से यह पता नहीं लगता कि ‘बरामद की जाने वाली महिलाओं को किन-किन मानसिक व्यथाओं से गुजरना पड़ा अथवा किन-किन पीड़ाओं को झेलना पड़ा। उन मानसिक व्यथाओं और पीड़ाओं का पता तो उन महिलाओं की जुबानी’ ही लग सकता है, जिन्होंने उन्हें झेला। इस प्रकार मौखिक इतिहास की पद्धतियाँ विभाजन के विषय में हमारी समझ को विस्तृत बनाती हैं। मौखिक इतिहास की पद्धतियों से इतिहासकारों को विभाजन जैसी घटनाओं के दौरान जनसामान्य को किन-किन मानसिक एवं शारीरिक पीड़ाओं को झेलना पड़ा, का बहुरंगी एवं सजीव वृत्तांत लिखने में महत्त्वपूर्ण सहायता मिलती है। मौखिक विवरणों अथवा बयानों से निकलनेवाले निष्कर्षों की तुलना अन्य साक्ष्यों से निकलनेवाले निष्कर्षों से करके एक सामान्य एवं विश्वसनीय निष्कर्ष पर सरलतापूर्वक पहुँचा जा सकता है। यदि साक्षात्कार लेने वाला किसी की व्यक्तिगत पीड़ा और सदमें को आंकने का प्रयास न करके सूझ-बूझ से लोगों के दर्द के अहसास को समझने का प्रयास करे तो मौखिक इतिहास उसकी विभाजन विषयक समझ को विस्तार प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकता है।