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Question
मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
Solution
मीठी वाणी/बोली संबंधी दोहे-
(क) बोली एक अमोल है जो कोई बोले जानि ।
हिए तराजू तौलि के तब मुँह बाहर आनि ।।
(ख) कागा काको सुख हरै, कोयल काको देय।
मीठे वचन सुनाय के, जग अपनो करि लेय ।।
(ग) मधुर वचन है औषधी कटुक वचन है तीर ।
स्रवण द्वार हवै संचरै सालै सकल शरीर ।।
ईश्वर प्रेम संबंधी दोहा-
(घ) रहिमन बहु भेषज करत, व्याधि न छाँड़त साथ ।
खग मृग बसत अरोग बन हरि अनाथ के नाथ ।।
अन्य दोहों का संकलन छात्र स्वयं करें।
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मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?
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भाव स्पष्ट कीजिए−
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।
भाव स्पष्ट कीजिए−
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भाव स्पष्ट कीजिए−
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निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।। बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बोरा होइ।। |
- कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं?
(a) ईश्वर से बिछुड़ने के कारण।
(b) ईश्वर को प्राप्त न कर सकने के कारण।
(c) विषय-वासनाओं में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
(d) ईश्वर भजन में लिप्त मनुष्यों को देखकर। - 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं?
(a) निद्रा और अनिद्रा के
(b) अंधकार और प्रकाश के
(c) अज्ञान और ज्ञान के
(d) दुःख और सुख के - किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता?
(a) जिसका मन सांसारिक विषय-वासनाओं में लिप्त हो।
(b) जिसका मन अहंकार की भावना से भरा हो।
(c) जिसके मन में विरह रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
(d) जिसके मन में मिलन रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो। - कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है?
(a) जिसे प्रभु का साक्षात्कार हो गया है।
(b) जो प्रभु से विलग रहना चाहता है।
(c) जो प्रभु की दिन-रात सेवा कर रहा है।
(d) जो प्रभु के वियोग में जीवन व्यतीत कर रहा है। - 'मंत्र न लगना' का अर्थ हैः
(a) पीड़ित व्यक्ति का स्वस्थ न होना
(b) विष का प्रभाव कम न होना
(c) मंत्र सिद्ध न होना
(d) कोई उपाय काम न आना
कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?
- हमारा शरीर शीतल होता है।
- बोली में अहं का भाव आता है।
- हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
- सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।