English

मितव्ययिता के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए। - Economics (अर्थशास्त्र)

Advertisements
Advertisements

Question

मितव्ययिता के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए।

Answer in Brief

Solution

मितव्ययिता के विरोधाभास का अर्थ-मितव्ययिता के विरोधाभास से अभिप्राय यह है कि यदि अर्थव्यवस्था के सभी लोग अपनी आय से बचत के अनुपात को बढ़ा दें तो अर्थव्यवस्था में बचत के कुल मूल्य में वृद्धि नहीं होगी। इसका कारण यह है कि सीमांत बचत प्रवृत्ति के बढ़ने से सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कम हो जाती है। और निवेश गुणक भी कम हो जाता है। फलस्वरूप आय में वृद्धि की दर भी कम हो जाती है। इस प्रकार बचत बढ़ाने से कुल बचत का बढ़ना आवश्यक नहीं है। नीचे दिए चित्र में स्पष्ट है कि सीमांत उपभोग प्रवृत्ति के कम SS से S1S1 पर खिसक गया। फलस्वरूप राष्ट्रीय आय भी घटकर Oy1 से Oy2 हो जाती है। जिससे बचत फिर कम हो जाएगी। इस प्रकार बचत में वृद्धि नहीं हो सकेगी। मितव्ययिता से हम आय बढ़ाना चाहते थे, परंतु यह विरोधाभास है कि इससे आय बढ़ने की बजाय कम हो गई।

shaalaa.com
लघु अवधि में संतुलन आय का निर्धारण
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 4: आय और रोजगार के निर्धारण - अभ्यास [Page 69]

APPEARS IN

NCERT Economics - Introductory Macroeconomics [English] Class 12
Chapter 4 आय और रोजगार के निर्धारण
अभ्यास | Q 6. | Page 69

RELATED QUESTIONS

सीमांत उपभोग प्रवृत्ति किसे कहते हैं? यह किस प्रकार सीमांत बचत प्रवृत्ति से संबंधित है?


प्रत्याशित निवेश और यथार्थ निवेश में क्या अंतर है?


‘ किसी देश में पैरामेट्रिक शिफ्ट ‘ से आप क्या समझते हैं? रेखा में किस प्रकार शिफ्ट होता है जब इसकी

  1. ढाल घटती है और
  2. इसके अन्त:खण्ड में वृद्धि होती है?

‘ प्रभावी माँग ‘ क्या है? जब अंतिम वस्तुओं की कीमत और ब्याज की दर दी हुई हो, तब आप स्वायत्त व्यय गुणक कैसे प्राप्त करेंगे?


जब स्वायत्त निवेश और उपभोग व्यय (A) 50 करोड़ र हो और सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) 0.2 तथा आय (y) का स्तर 4,00,000 करोड़ ₹ हो तो प्रत्याशित समस्त माँग ज्ञात करें। यह भी बताएँ कि अर्थव्यवस्था संतुलन में है या नहीं (कारण भी बताएँ)।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×