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मोहनजोदड़ो की सभ्यता को लो-प्रोफाइल सभ्यता क्यों माना गया है? - Hindi (Core)

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Question

मोहनजोदड़ो की सभ्यता को लो-प्रोफाइल सभ्यता क्यों माना गया है?

Answer in Brief

Solution

लेखक ने सिंधु सभ्यता को ‘लो प्रोफाइल’ सभ्यता कहा है। संसार के अन्य स्थानों पर खुदाई करने से राजतंत्र को प्रदर्शित करने वाले महल, धर्म की ताकत दिखाने वाले पूजा स्थल, मूर्तियाँ तथा पिरामिड मिले हैं। मोहनजोदड़ो में ऐसी कोई चीज नहीं मिली है जो राजसत्ता या धर्म के प्रभाव को दर्शाती है। कला की दृष्टि से हड़प्पा सभ्यता अत्यंत समृद्ध थी। इस सभ्यता के लोगों में कला के प्रति समृद्ध दृष्टि तत्कालीन मनुष्यों की दैनिक प्रयोग की वस्तुओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है; जैसे-वहाँ की वास्तुकला तथा नियोजन, धातु एवं पत्थर की मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन एवं उन पर बने चित्र, वनस्पति एवं पशु-पक्षियों की छवियाँ, मुहरें, उन पर उत्कीर्ण आकृतियाँ, खिलौने, केश-विन्यास, आभूषण, सुघड़ लिपि आदि तत्कालीन समय में विद्यमान हड़प्पा सभ्यता के सौंदर्यबोध को व्यक्त करती हैं। कोई भी ऐसी मूर्ति या चित्र उपलब्ध नहीं हुआ है, जिसमें प्रभुत्व या दिखावे के तेवर व्याप्त हों। कहने का आशय यह है कि हड़प्पा सभ्यता कला की दृष्टि से अत्यधिक समृद्ध तो थी, लेकिन यह कला-सौंदर्य राजपोषित या धर्मपोषित न होकर समाज पोषित थी अर्थात् कहा जा सकता है कि मोहनजोदड़ो की सभ्यता लो प्रोफाइल सभ्यता थी।

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अतीत में दबे पाँव
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2021-2022 (April) Term 2 Sample

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सिंधु-सभ्यता साधन-सपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडबर नहीं था। कैसे?


“सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध हैं जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।” ऐसा क्यों कहा गया? 


पुरातत्व के किन चिहनों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि-‘सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी?”


‘यह सच है कि यहाँ किसी अगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आपको कहीं नहीं ले जातीं; वे आकाश की तरफ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैं, वहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रह हैं।” इस कथन के पीछ लखक का क्या आशय हैं?


‘टूटे-फूटे खडहर, सभ्यता और सस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती जिंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज होते हैं।”-इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।


इस पाठ में एक ऐसे स्थान का वर्णन हैं जिसे बहुत कम लोगों ने देखा होगा, परंतु इससे आपके मन में उस नगर की एक तसवीर बनती है। किसी ऐस ऐतिहासिक स्थल, जिसको आपने नजदीक से देखा हो, का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।


नदी, कुएँ स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए लखक पाठकों स प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-सस्कृति कह सकते हैं? आपका जवाब लखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तक दें।


सिंधु घाटी सभ्यता का कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला है। सिर्फ अवशेषों के आधार पर ही धारणा बनाई गई है। इस लेख में मुअनजो-दड़ो के बारे में जो धारणा व्यक्त की गई है क्या आपके मन में इससे कोई भिन्न धारणा या भाव भी पैदा होता है? इन सभावनाओं पर कक्षा में समूह-चर्चा करें।


सिंधु सभ्यता के केंद्र में समाज था, राजा या धर्म नहीं ! सिद्ध कीजिए।


सिंधु घाटी की सभ्यता के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

(I) महाकुंड स्तूप में उत्तर और दक्षिण से सीढ़ियाँ उतरती हैं।

(II) मोहनजोदड़ो सभ्यता में सूत की कताई, बुनाई और रंगाई भी होती थी।

(III) सिंधु घाटी सभ्यता में जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत बुरी थी।

(IV) मोहनजोदड़ो से मिला नरेश के सिर का मुकुट बहुत छोटा था।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?


राखालदास बनर्जी कौन थे?


संसार के प्राचीनतम दो नियोजित शहर किसे माना गया है?


मुअनजो-दड़ो की अनूठी मिसाल क्या है?


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन (I): सिंधु सभ्यता में नगर नियोजन उन्नत नहीं था।

कथन (II): सिंधु घाटी सभ्यता की खूबी सौंदर्य बोध है।

कथन (III): मुअनजो-दड़ो छोटे-मोटे टीलों पर बसा था।

कथन (IV): सिंधु घाटी सभ्यता टीलों पर आबाद थी।

सही कथन/कथनों वाले विकल्प को चयनित कर लिखिए।


निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

अजायबघर में रखे सिंधु-सभ्यता के पुरातत्व के अवशेषों से किसका महत्व सिद्ध होता है - कला का या ताकत का? तर्क सहित उत्तर दीजिए।


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