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Question
निबंध लिखिए:
घायल सैनिक की आत्मकथा
Solution
घायल सैनिक की आत्मकथा
एक सैनिक हमेशा देश के लिए निडर होकर लड़ता है। वह अपनी जान जोखिम में डालने से पूर्व एक बार भी सोचता नहीं है। सीमा पर तैनात वह हमेशा अपने मातृभूमि की रक्षा करता है। सिपाही का फ़र्ज़ होता है, देश और देशवासियों की रक्षा करना। सैनिक आखरी साँस तक अपने मातृभूमि के लिए लड़ता है। शहीद की पत्नी और उसके परिवार को उस पर गर्व होता है। देश और देशवासियों की रक्षा करना उसका परम कर्त्तव्य है। सैनिक, सेना के कठिन प्रशिक्षण से गुजरते है। वह शपथ लेते है कि देश के आगे और देश से बढ़कर उनके लिए और कुछ नहीं है।
मेरा नाम रनविजय शिंदे है, आज मैं अपनी कथा बताने जा रहा हूँ। मैं महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गाँव हूँ। मेरे पिताजी और मेरे चाचाजी भी फ़ौज में भर्ती थे। सैनिक प्रशिक्षण में हर प्रकार के ड्रिल सिखाये जाते है। बन्दूक, मशीनगन, तोप चलाना, सभी प्रशिक्षण मैंने सीखा। दुश्मनो का निडर होकर कैसे सामना करना चाहिए और उनके छक्के छुड़ाना सभी चीज़ें प्रशिक्षण के समय सिखाई जाती है। लेकिन मेरे लिए पैसा कमाना अहम नहीं था। मेरे पिताजी भी सेना में बड़े अफसर थे। उन्होंने भी अपने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।
आज युद्ध लड़ते लड़ते अचानक मैं घायल हो गया हूँ। लेकिन मुझे अपनी नहीं देश की फ़िक्र है। मैं अपनी परवाह बिलकुल नहीं करता हूँ। मैंने देश के लिए अपनी जान समर्पित कर दी है। इसका मुझे कोई गम नहीं है| बचपन में अपने साथियों को कहते हुए सुनता था कि उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और बड़े अफसर इत्यादि बनना है। मैं पिताजी के कदमो का अनुकरण करते हुए हमेशा से सैनिक बनना चाहता था। मैं बचपन से ही देश प्रेम के भाव के भावनाओ से प्रेरित हूँ। युद्ध में घायल होने के बाद तड़पता और अपने-आप से पूछता हूँ अपने जीवन में क्या-क्या किया ? अब, मैं बुरी तरह से घायल अपने परिवार, मित्रों को याद करता हूँ, उन्हें यह आशा भी नहीं रहती की मैं अब आगे का जीवन जी सकुूँगा या नहीं।
आज मेरी पत्नी, बच्चे, माँ, पिताजी को जब ये पता लगेगा तो जरूर ही बहुत दुख होगे कि मैं घायल हो गया हूँ। लेकिन मुझे खुशी है कि घायल होकर मैंने अपने देश को बचा लिया है जब दुश्मनों ने मुझे घायल किया तो मैं और भी खतरनाक हो गया था और दुश्मन मुझसे और भी डरने लगे थे क्योंकि कहते हैं कि घायल शेर खतरनाक होता है वह मुझे घायल सैनिक को देखकर भागने लगे क्योंकि मैं वैसे भी घायल हो गया था। मैं किसी से नहीं डर रहा था। मैं बस उनका लगातार सामना किए जा रहा था। सबको मेरे ऊपर जरूर ही गर्व होगा। मैं अपने पूरे देशवासियों से, अपने पूरे परिवार से कहना चाहता हूँ कि अगर मुझे कुछ हो जाए तो दुखी मत होना बल्कि खुशी मनाना कि मैंने अपने देश को बड़ी मुसीबतों से बचा लिया है।