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निबंध लिखिए: मेरे प्रिय साहित्यकार -

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Question

निबंध लिखिए:

मेरे प्रिय साहित्यकार

Long Answer

Solution

मेरे प्रिय साहित्यकार

संसार ने सबकी अपनी-अपनी रूचि होती है किसी व्यक्ति की रुचि चित्रकारी में है, तो किसी की संगीत में, किसी की रुचि खेलकूद में है तो किसी की साहित्य में। मेरी अपनी रुचि भी साहित्य में रही है। मैंने सर्वप्रथम हिंदी साहित्य का यथाशक्ति अधिकाधिक अध्ययन करने का निश्चय किया और अब तक जितना अध्ययन हो पाया है, उसके आधार पर मेरे सर्वाधिक प्रिय साहित्यकार हैं- जयशंकर प्रसाद। प्रसाद जी केवल कवि ही नहीं, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार, निबंधकार भी हैं। प्रसाद जी ने हिंदी साहित्य में भाव और कला, अनुभूति और अभिव्यक्ति, वस्तु और शिल्प सभी क्षेत्रों में युगांतरकारी परिवर्तन किए हैं। उन्होंने हिंदी भाषा को एक नवीन अभिव्यंजना शक्ति प्रदान की है। इन सब ने मुझे उनका प्रशंसक बना दिया है और वह मेरे प्रिय साहित्यकार बन गए हैं।

श्री जयशंकर प्रसाद जी का जन्म सन 1889 ई० में काशी के प्रसिद्ध सुँघनी साहू परिवार में हुआ था। आपके पिता का नाम श्री. बाबू देवी प्रसाद था। लगभग 11 वर्ष की अवस्था में ही जयशंकर प्रसाद ने काव्य रचना आरंभ कर दी थी। 17 वर्ष की अवस्था तक इनके ऊपर विपत्तियों का बहुत बड़ा पहाड़ टूट पड़ा। इनके पिता, माता व बड़े भाई का देहांत हो गया और परिवार का समस्त उत्तरदायित्व उनके कंधों पर आ गया। प्रसाद जी की रचनाएं सन 1907-08 ई. में सामयिक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी थी। यह रचनाएं ब्रज भाषा की पुरानी शैली में थी। जिनका संग्रह 'चित्राधार' में हुआ। सन 1913 ई. में यह खड़ी बोली में लिखने लगे। प्रसाद जी ने पद्य और गद्य दोनों में साधिकार रचनायें की। उन्होंने काव्य में कानन-कुसुम, प्रेम पथिक, महाराणा का महत्त्व, झरना, आँसू, लहर और कामायनी (महाकाव्य); नाटक में इन्होंने कुल मिलाकर 13 नाटक लिखें। इनके प्रसिद्ध नाटक हैं - चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, कामना और धूरुवस्वामिनी ; उपन्यास में कंकाल, तितली और इरावती ; कहानी में उन्होंने प्रसाद की विविध कहानियों के पांच संग्रह हैं- छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आंधी और इंद्रजाल और निबंध में प्रसाद जी ने साहित्य के विविध विषयों से संबंधित निबंध लिखे, जिनका संग्रह है- काव्य और कला तथा अन्य निबंध।

प्रसाद की रचनाओं में छायावाद पूर्ण प्रौढ़ता, शालीनता, गुरुता और गंभीरता को प्राप्त दिखाई देता है। अपनी विशिष्ट कल्पना शक्ति, मौलिक अनुभूति एवं नूतन अभिव्यक्ति पद्धति के फलस्वरुप प्रसाद हिंदी-साहित्य में मूर्धन्य स्थान पर प्रतिष्ठित हैं। समग्रतः यह कहा जा सकता है कि प्रसाद जी का साहित्यक व्यक्तित्व बहुत महान है जिस कारण वह मेरे सर्वाधिक प्रिय साहित्यकार रहे हैं।

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