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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 6th Standard

नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो: कमल राष्ट्रीय फूल - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:

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Solution

कमल राष्ट्रीय फूल

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 2.09: वह देश कौन-सा है? - वह देश कौन-सा है? [Page 52]

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Balbharati Hindi - Sulabhbharati 6 Standard Maharashtra State Board
Chapter 2.09 वह देश कौन-सा है?
वह देश कौन-सा है? | Q १२. (५) | Page 52

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स्‍वामी विवेकानंद का कोई भाषण पढ़ो और प्रमुख वाक्‍य बताओ।


किसी महान विभूति का जीवनक्रम वर्षानुसार बनाकर लाओ और पढ़ो : जैसे- जन्म, शालेय शिक्षा आदि।



।। कथनी मीठी खाँड़-सी ।।


किसी परिचित अन्य कहानी लेखन के लिए मुद्‌दे तैयार करो।


दिए गए चित्रों के आधार पर उचित और आकर्षक विज्ञापन तैयार करो।


फल-फूलों के दस-दस नाम लिखो।

फलों के नाम फूलों के नाम
१. ______ १. ______
२. ______ २. ______
३. ______ ३. ______
४. ______ ४. ______
५. ______ ५. ______
६. ______ ६. ______
७. ______ ७. ______
८. ______ ८. ______
९. ______ ९. ______
१०. ______ १०. ______

नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


अपनी कक्षा द्‍वारा की गई किसी क्षेत्रभेंट का वर्णन लिखिए।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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