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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए- राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया? - Hindi Course - B

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Question

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?

One Line Answer

Solution

तीसरी कसम की कहानी सुनने के बाद जब राजकपूर ने गम्भीरता से मेहनताना माँगा तो शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया क्योंकि उन्हें ऐसी उम्मीद न थी।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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Chapter 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - मौखिक [Page 94]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Sparsh Part 2 Class 10
Chapter 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
मौखिक | Q 7 | Page 94

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

'तीसरी कसम' फ़िल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर ने 'मेरा नाम जोकर' के निर्माण के समय किस बात की कल्पना भी नहीं की थी?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

शैलेन्द्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं। अपने शब्दों में लिखिए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए।


फणीश्वरनाथ रेणु की किस कहानी पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म आधारित है, जानकारी प्राप्त कीजिए और मूल रचना पढ़िए।


लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।


‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।

क्र. सं फिल्म का नाम साहित्यिक रचना भाषा रचनाकार
1. देवदास देवदास बंगला शरतचंद्र
2. ______ ______ ______ ______
3. ______ ______ ______ ______

शैलेंद्र ने अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए दवा किया?


शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फ़िल्म चल रहीं, इसके कारण क्या थे?


‘तीसरी कसम’ में राजकपूर और वहीदा रहमान का अभिनय लाजवाब था। स्पष्ट कीजिए।


हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:

   राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान्‌ फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी।
  1. राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
    (a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
    (b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
    (c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
    (d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से।
  2. शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
    (a) कुशल फ़िल्म निर्माता
    (b) प्रसिद्ध गीतकार
    (c) आदर्शवादी भावुक कवि
    (d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति
  3. 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
    (a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
    (b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
    (c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
    (d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना।
  4. गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
    (a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
    (b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
    (c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
    (d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब।
  5. “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
    (a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।

उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?


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