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Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दीख पड़े थे। वह सोचने लगी-हाय! कितनी निर्दयी हूँ। जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान ! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो ! आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इंशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए, परन्तु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाए, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी । केवल इसी कारण कि, वह वृद्धा असहाय है। |
(1) लिखिए - (2)
गद्यांश में उल्लेखित रूप की मानसिकताएँ लिखिए-
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(2) रूपा की चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर 25 - 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
Answer in Brief
One Line Answer
Solution
(1)
- स्वार्थपरता
- अन्यायी प्रवृत्ति
(2) कुछ गलत सूचनाओं के आधार पर, आयकर एजेंसी लेखक के घर पर छापा मारती है। इस मामले में अधिकारी विभिन्न विषयों पर लेखक से सवाल करते हैं, और बेचारा लेखक उसके निजी जीवन के मुद्दों पर चर्चा करके जवाब देता है। नतीजतन, एक हास्यपूर्ण स्थिति होती है।
shaalaa.com
बूढ़ी काकी
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