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Question
निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए:
सत्संग का प्रभाव
Solution
सत्संग का प्रभाव
मगध के जंगलों में एक निर्दयी डाकू रहता था, जो लोगों को लूटकर मार डालता और उनकी उँगली काटकर उससे माला बनाता था। इसी कारण उसका नाम अंगुलिमाल पड़ा। गाँव के सभी लोग उससे भयभीत और परेशान थे।
एक दिन गौतम बुद्ध उस गाँव में आए और अगले दिन जंगल की ओर जाने लगे। गाँव वालों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन बुद्ध नहीं माने। जंगल में अंगुलिमाल तलवार लेकर उनकी राह में खड़ा हो गया। बुद्ध बिना घबराए उसकी गुफा के सामने से निकल गए और पलटकर भी नहीं देखा। अंगुलिमाल ने उन्हें रोककर लूटने की धमकी दी। बुद्ध शांत स्वर में बोले, 'मैं कैसे मान लूँ कि तुम सबसे शक्तिशाली हो? तुम्हें इसे साबित करना होगा।'
अंगुलिमाल ने पूछा कि उसे क्या करना होगा। बुद्ध ने उसे पेड़ से दस पत्तियाँ तोड़ने को कहा। अंगुलिमाल ने तुरंत पत्तियाँ तोड़ दीं। तब बुद्ध ने कहा, 'अब इन पत्तियों को वापस पेड़ पर लगा दो।' यह सुनकर अंगुलिमाल निरुत्तर हो गया। बुद्ध ने समझाया, 'यदि तुम किसी चीज को जोड़ नहीं सकते, तो उसे तोड़ने का भी अधिकार तुम्हें नहीं है। इसी तरह, यदि तुम जीवन नहीं दे सकते, तो किसी को मारने का अधिकार भी तुम्हें नहीं है।'
बुद्ध की इन बातों से अंगुलिमाल को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अपना जीवन बदल लिया, बुद्ध का शिष्य बन गया और गाँव में रहकर लोगों की सेवा करने लगा।
शिक्षा: मनुष्य के व्यक्तित्व पर संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसी संगति होती है, वैसा ही स्वभाव बनता है। इसलिए हमें सत्संगति अपनानी चाहिए।