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'निर्धनता' 'भेदभाव' से कैसे संबंधित है? निर्धनता तथा वंचन के मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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Question

'निर्धनता' 'भेदभाव' से कैसे संबंधित है? निर्धनता तथा वंचन के मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

Answer in Brief

Solution

निर्धनता की सर्वसामान्य परिभाषा है की यह एक ऐसी दशा है जिसमे जीवन में आवश्यक वस्तुओं का आभाव होता है तथा इसका संदर्भ समाज में धन अथवा संपत्ति का आसमान वितरण होता है। जाति तथा निर्धनता के कारण सामाजिक असुविधा द्वारा सामाजिक भेदभाव या विभेदन की समस्या उत्पत्र हुई है। भेदभाव प्रायः पूर्वाग्रह से संबंधित होते हैं। निर्धनता के संदर्भ में भेदभाव का अर्थ उन व्यवहारों से है जिनके द्वारा निर्धन तथा धनी के बिच विभेद किया जाता है जिससे धनी तथा सुविधासंपन व्यक्तियों का निर्धन तथा सुविधावचित व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक पक्षपात किया जाता है। यह विभेद सामाजिक अंत: क्रिया, शिक्षा तथा रोजगार के क्षेत्रों में देखी जा सकती है। इस प्रकार, निर्धन या सुविधावचित व्यक्तियों में क्षमता होते हुए भी उन्हें उन अवसरों से दूर रखा जाता है। जो समाज के बाकी लोगों को उपलब्ध होते हैं। निर्धनों के बच्चो को अच्छे विद्यालयों में अध्ययन करने या अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग करने तथा रोजगार के अवसर नहीं मिलते हैं। सामाजिक असुविधा तथा भेदभाव के कारण निर्धन अपनी सामाजिक - आर्थिक दशा को अपने प्रयासों से उत्रत करने में बाधित हो जाते है और इस प्रकार निर्धन और भी निर्धन होते जाते है। संक्षेप में, निर्धनता तथा भेदभाव इस प्रकार से संबद्ध हैं की भेदभाव निर्धनता का कारण तथा परिणाम दोनों ही हो जाता है। यह सुस्पष्ट है की निध नता या जाति के आधार पर भेदभाव सामाजिक रूप से अन्यायपूर्ण है तथा उसे हटाना ही होगा। निर्धनता तथा वंचन की मनोवैज्ञानिक विशेषताएँ तथा उनके प्रभाव : निर्धनता तथा वंचन हमारे समाज की सुस्पष्ट समस्याओं में से हैं। भारतीयों समाज - विज्ञानियों ने जिनमें समाजशास्त्री मनोवैज्ञानिक तथा अर्थशस्त्री सभी शामिल हैं, समाज के निर्धन एवं वंचित वर्गो के ऊपर सुव्यवस्थित शोधकार्य किए हैं। उनके निष्कर्ष तथा प्रेक्षण यह प्रदर्शित करते हैं की निर्धनता तथा वंचन के प्रतिकूल प्रभाव अभिप्रेरणा, व्यक्तित्व, सामाजिक व्यवहार, संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं तथा मानसिक स्वास्थ्य पर परिलक्षित होते हैं।

  1. अभिप्रेरणा के संबंध में पाया गया है निर्धन व्यक्तियों में निम्र आकांक्षा स्तर और दुर्बल उपलब्धि अभिप्रेरणा तथा निर्भरता की प्रबल आवश्यकता परिलक्षित होती हैं। वे अपनी सफलताओ की व्याख्या भाग्य के आधार पर करते हैं न की योग्यता कठिन परिश्रम के आधार पर। सामान्यतः उनका यह विश्वास होता है की उनके बाहर जो घटक हैं वे उनके जीवन की घटनाओं को नियंत्रित करते हैं, उनके भीतर के घटक नहीं।
  2. जहाँ तक व्यक्तित्व का संबंध है निर्धन एवं वंचित व्यक्तियों में आत्म - सम्मान का निम्र स्तर और दुनिश्चित तथा अंतर्मुखता का उच्च स्तर पाया जाता है। वे भविष्योन्मुखता की तुलना में असत्र वर्तमान के ही विचारो में खोए रहते है। वे बड़े किन्तु सुदूर पुरस्कारों की तुलना में छोटे किन्तु तात्कालिक पुरस्कारों को अधिक वरीयता देते हैं क्योंकि उनके प्रत्यक्षण के अनुसार भविष्य बहुत ही अनिश्चित है। वे निराशा, शक्तिहीनता और अनुभूत अन्याय के बोध के साथ जीते है तथा अपनी अनन्यता के खो जाने का अनुभव करते हैं।
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मनोविज्ञान तथा सामाजिक सरोकार
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Chapter 8: मनोविज्ञान एवं जीवन - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 185]

APPEARS IN

NCERT Psychology [Hindi] Class 12
Chapter 8 मनोविज्ञान एवं जीवन
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 8. | Page 185
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