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निषेधात्मक संवेगों के प्रबंधन हेतु उपाय सुझाइए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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Question

निषेधात्मक संवेगों के प्रबंधन हेतु उपाय सुझाइए।

Long Answer

Solution

आधुनिक काल में सफल संवेग प्रबंधन ही प्रभावी सामाजिक प्रबंधन की कुंजी है। निम्नलिखित युक्तियाँ सम्भवत: संवेगों के वांछित संतुलन बनाए रखने के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी।

  1. आत्म-जागखूकता को बढ़ाड़ए :
    अपने संवेगों और अनुभूतियों को जानिए, उनके प्रति जागरूक होइए। अपनी अनुभूतियों के 'क्यों' तथा “कैसे' के बारे में अंतर्दृष्टि विकसित कौजिए।
  2. परिस्थिति का वास्तविकता पूर्ण आकलन कीजिए :
    यह मत प्रतिपादित किया गया है कि संवेग के पूर्व घटना का मूल्यांकन किया जाता है। यदि घटना का अनुभव बाधा पहुँचाने वाला होता है, तो आपका अनुकंपी तंत्रिका-तंत्र उद्देलित हो जाता है तथा आप दबाव का अनुभव करने लगते हैं। यदि आप घटना का अनुभव बाधा पहुँचाने वाले के रूप में नहीं करते तो कोई दबाव भी नहीं होता। अतः वस्तुत: आप ही यह निर्णय करते हैं कि दुखी और दुश्चिंतित अनुभव करें या प्रसन्‍न और शांत।
  3. आत्म-परिवीक्षण कीजिए :
    इसके अंतर्गत, सतत या समय-समय पर अपनी पूर्व उपलब्धियों, संवेगात्मक और शारीरिक दशा, तथा वास्तविक एवं प्रतिस्थानिक अनुभवों का मूल्यांकन शामिल है। एक सकारात्मक मूल्यांकन आपके स्वयं पर विश्वास की वृद्धि करेगा तथा कल्याण एवं संतोष की भावना बढ़ाएगा।
  4. आत्म-प्रतिरूपण का निर्माण कीजिए :
    स्वयं अपना आदर्श बनिए। अपने पुराने अच्छे निष्पादन का बार-बार प्रक्षण कीजिए तथा उनका उपयोग भविष्य के लिए प्रेरणा और अभिप्रेरणा के रूप में और भी बेहतर निष्पादन के लिए कीजिए।
  5. प्रात्यक्षिक पुनर्व्यवस्था तथा संज्ञानात्मक युनर्रचना :
    घटनाओं के दूसरे पहलू का निरीक्षण कौजिए तथा सिक्के के दूसरे पहलू पर भी ध्यान दीजिए। अपने विचारों का पुनर्गठन, विध्यात्मक तथा संतोष प्रदान करने वाली अनुभूतियों में वृद्धि करने तथा निषेधात्मक विचारों का परिहार करने के लिए कौजिए।
  6. सर्जनात्मक बनिए :
    कोई रुचि या शौक विकसित 'कौजिए। किसी ऐसी क्रिया, जो आपकी रुचि की है तथा आपका मनोरंजन करती है, में भाग लीजिए।
  7. अच्छे संबंधों को विकसित कीजिए तथा पोषण कीजिए :
    अपने मित्रों का चयन संभाल कर कौजिए। यदि आपके मित्र प्रसन्‍न और हर्षित होंगे तो उनके साथ सामान्यतः आप भी प्रसन्न रहेंगे।
  8. तदनुभूति रखिए :
    दूसरों की भावनाओं को समझने का प्रयास कीजिए। अपने संबंधों को अर्थपूर्ण तथा मूल्यवान बनाइए। पारस्परिक रूप से सहायता माँग भी लीजिए और दीजिए भी।
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निषेधात्मक संवेगों का प्रबंधन
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Chapter 9: अभिप्रेरणा एवं संवेग - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 195]

APPEARS IN

NCERT Psychology [Hindi] Class 11
Chapter 9 अभिप्रेरणा एवं संवेग
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 8. (b) | Page 195
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