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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

पराधीन सपने हूँ सुख नाहीं। - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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Question

पराधीन सपने हूँ सुख नाहीं।

Short Answer

Solution

"पराधीन सपने हुँ सुख नाहीं" गोस्वामी तुलसीदास की एक प्रसिद्ध उक्ति है, जिसका अर्थ है कि पराधीन व्यक्ति स्वप्न में भी सुख का अनुभव नहीं कर सकता। पराधीनता, अर्थात् दूसरों के अधीन रहना, मानव जीवन के लिए एक अभिशाप के समान है। ऐसे व्यक्ति की इच्छाएँ, विचार, और कार्य स्वतंत्र नहीं होते, जिससे उसकी आत्मनिर्भरता और सृजन शीलता बाधित होती है। इसलिए, स्वाधीनता का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह आत्मसम्मान, आत्मविश्वास, और सृजनशीलता को प्रोत्साहित करती है। स्वतंत्रता के बिना, न तो व्यक्ति और न ही राष्ट्र का समुचित विकास संभव है।

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Chapter 1.7: मेरे देश के लाल - अंतःपाठ प्रश्न [Page 24]

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Balbharati Integrated 7 Standard Part 2 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 1.7 मेरे देश के लाल
अंतःपाठ प्रश्न | Q ७. | Page 24
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